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Ganga Dussehra 2026 Date: रवि योग में इस दिन मनाया जाएगा गंगा दशहरा, जानें सही तारीख पूजा मुहूर्त और महत्व

Ganga Dussehra 2026 Date: रवि योग में इस दिन मनाया जाएगा गंगा दशहरा, जानें सही तारीख पूजा मुहूर्त और महत्व

Last Updated on May 2, 2026 17:00, PM by Pawan

Ganga Dussehra 2026 Date: गंगा को पतित पावनी कहते हैं। यह पावन नदी मनुष्य का पाप धोने के लिए जिस दिन धरती पर उतरी थी, वह ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी। इसलिए हर साल ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। गंगा दशहरा ज्येष्ठ माह में आता है, इसलिए इसे ज्येष्ठ या जेठ का दशहरा भी कहा जाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। यही नहीं, गंगा दशहरा के दिन भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करने उनकी कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मां गंगा धरती पर आई थीं, इसलिए इस दिन को गंगा अवतरण दिवस भी कहते हैं। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास पड़ रहा है, इसलिए भक्तों में दुविधा है कि इस बार गंगा दशहरा किस दिन होगा? तो जिस साल ज्येष्ठ माह में अधिकमास जुड़ता है, तब अधिकमास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि इस साल गंगा दशहरा कब है? गंगा दशहरा का मुहूर्त और महत्व क्या है?

2026 में गंगा दशहरा कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास की शुक्ल दशमी तिथि 25 मई को प्रात: 04:30 बजे से शुरू हो रही है और 26 मई को प्रात: 05:10 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार गंगा दशहरा 25 मई सोमवार को है।

गंगा दशहरा 2026 मुहूर्त

गंगा दशहरा पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे उत्तम समय माना गया है। गंगा दशहरा पर ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:04 बजे से लेकर प्रात: 04:45 बजे तक है। गंगा दशहरा पर सूर्योदय प्रात: 05:26 बजे होगा।

गंगा दशहरा के दिन का शुभ समय

अभिजीत मुहूर्त : 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक

प्रातः सन्ध्या : प्रात: 04 बजकर 24 बजे से सुबह 05 बजकर 26 मिनट तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 05 बजकर 26 मिनट से सुबह 07 बजकर 09 मिनट तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 08 बजकर 52 मिनट से सुबह 10 बजकर 35 मिनट तक

रवि योग में गंगा दशहरा

इस साल गंगा दशहरा पर पूरे दिन रवि योग रहेगा। इस योग में सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं क्योंकि इसमें ग्रहों के राजा सूर्य का प्रभाव अधिक होता है। वहीं, इस दिन वज्र योग प्रात:काल से लेकर 26 मई को तड़के 03 बजकर 15 मिनट तक है। इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र भी प्रात:काल से लेकर 26 मई को 04:08 बजे तक है।

गंगा दशहरा का महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, कपिल मुनि के श्राप की वजह से राजा सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार नहीं हो रहा था। राजा सगर के वंश में राजा भगीरथ हुए, उन्होंने राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष दिलाने के लिए गंगा को धरती पर लाने का निश्चय किया क्योंकि गंगा के स्पर्श से ही उन सभी को पापों से मुक्ति मिल सकती थी और वे मोक्ष पा सकते थे। तब राजा भगीरथ अपने कठोर तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके गंगा को धरती पर लाए। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं, उनके स्पर्श मात्र से राजा सगर के 60 पुत्रों के पाप मिट गए और उनको मोक्ष मिला। तब से गंगा स्नान पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का माध्यम बन गया।