stock-markett.online
‘6 महीने हम डिस्टर्ब नहीं करेंगे’ आखिर स्टालिन क्या खेल खेल रहे हैं? विजय के लिए ‘राहत’ नहीं ‘आफत’ हैं ये 180 दिन!

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) को अब सरकार बनाने का रास्ता लगभग साफ दिख रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) अगले 6 महीने तक नई सरकार के कामकाज में दखल नहीं देगी। यानी अगर TVK प्रमुख Vijay सरकार बनाते हैं, तो DMK तुरंत उन्हें गिराने की कोशिश नहीं करेगी।

234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में किसी पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिला।

  • TVK: 108 सीट
  • DMK गठबंधन: 73 सीट
  • AIADMK गठबंधन: 53 सीट

बहुमत के लिए 118 सीट चाहिए।

कांग्रेस ने TVK को 5 सीटों का समर्थन दिया है, जिससे आंकड़ा 113 तक पहुंच गया। फिर भी बहुमत से 5 सीट कम हैं।

इसी बीच स्टालिन ने कहा कि DMK 6 महीने तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाएगी और जनता ने जो बदलाव चुना है, उसे मौका दिया जाना चाहिए। अब सवाल है कि- आखिर स्टालिन ऐसा क्यों कर रहे हैं?

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह हार मानना नहीं बल्कि बहुत सोच-समझकर खेला गया दांव है। इसके पीछे कई कारण हैं-

विजय को “बेचारा हीरो” बनने से रोकना

अगर DMK सरकार बनने से पहले ही जोड़-तोड़ या दबाव की राजनीति करती, तो विजय खुद को “सिस्टम के खिलाफ लड़ने वाले हीरो” के रूप में पेश कर सकते थे।

लेकिन अब स्टालिन ने पीछे हटकर विजय से कह दिया है , “ठीक है, जनता ने मौका दिया है, अब काम करके दिखाओ।”

इससे विजय के पास भविष्य में कोई बहाना बनाने का मौका कम रहेगा और उन्हें खुद को साबित करना होगा।

बड़े-बड़े वादों का बोझ अब विजय पर

चुनाव प्रचार में विजय ने कई बड़े वादे किए थे। सबसे चर्चित वादा था महिलाओं को हर महीने ₹2500 देने का। यह रकम DMK की मौजूदा ₹1000 योजना से ढाई गुना ज्यादा है।

अब सवाल यह है कि भारी कर्ज में डूबा तमिलनाडु इतना पैसा कहां से लाएगा? स्टालिन शायद यही देखना चाहते हैं कि TVK अपने वादे निभा पाती है या नहीं।

यानी अगले 6 महीने विजय के लिए असली परीक्षा होंगे।

राज्यपाल पर दबाव बढ़ाना

अब तक राज्यपाल आरवी अर्लेकर पहले विजय को सरकार बनाने का न्योता देने में हिचकिचा रहे थे, क्योंकि TVK के पास पूरे 118 विधायक नहीं हैं।

लेकिन अब जब सबसे बड़ी पार्टी सरकार बनाना चाहती है और दूसरी सबसे बड़ी पार्टी DMK भी विरोध नहीं कर रही, तो राज्यपाल के लिए रोकना मुश्किल हो गया है।

हालांकि, इस मामले में DMK ने खुलकर विजय का ही समर्थन किया और विजय के सरकार बनाने के दावे को राज्यपाल की तरफ से ठुकराए जाने को ‘गलत’ बताया है।

DMK नेता ए सरवनन ने कहा कि अगर चुनाव से पहले बना कोई गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाया है, तो संवैधानिक परंपरा के मुताबिक, सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।

सरवनन ने कहा कि तमिलनाडु में इस बार किसी भी प्री-पोल गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। साथ ही अभी तक किसी दूसरी पार्टी ने सरकार बनाने का दावा भी पेश नहीं किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि विजय की TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा किया है। पार्टी ने 113 विधायकों का समर्थन होने की जानकारी भी दी है।

DMK नेता के इस बयान को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिल रहा है कि विपक्ष के कुछ नेता भी मानते हैं कि मौजूदा स्थिति में सबसे पहले TVK को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।

DMK को भी मिला तैयारी का समय

ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस के TVK को समर्थन देने से DMK और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव आ गया है। हालांकि, खबर ये भी है कि DMK ने अपने सहयोगी दलों को खुली छूट दे दी है कि वे अपने राजनीतिक हितों के हिसाब से फैसला करें कि उन्हें TVK के साथ जाना है या नहीं। आज ही VCK और वामपंथी दलों के नेताओं ने विजय के साथ जाने के मुद्दे पर DMK नेता से मुलाकात की थी।

ऐसे में स्टालिन फिलहाल खुद को “जिम्मेदार नेता” के रूप में दिखाना चाहते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्टालिन का यह कदम काफी रणनीतिक है। एक तरफ वह खुद को लोकतांत्रिक और शांत नेता के रूप में दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सहयोगी दलों को स्वतंत्र छोड़कर भविष्य की राजनीतिक संभावनाएं भी खुली रख रहे हैं।

उधर TVK और कांग्रेस के बीच मंत्रालय बांटने और सत्ता में तालमेल जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं। DMK शायद इंतजार कर रही है कि नई सरकार इन मुश्किलों में खुद उलझे।

आगे क्या हो सकता है?

स्टालिन की यह 180 दिन की “राहत” असल में एक तरह की राजनीतिक परीक्षा है।

अगर विजय इन 6 महीनों में सरकार ठीक से चला लेते हैं, वादे निभाते हैं और जनता का भरोसा बनाए रखते हैं, तो वह सिर्फ फिल्म स्टार नहीं बल्कि मजबूत नेता बन सकते हैं।

लेकिन अगर सरकार लड़खड़ाई, वादे पूरे नहीं हुए या गठबंधन में झगड़े शुरू हुए, तो DMK वापसी की तैयारी कर सकती है।

यानी तमिलनाडु की राजनीति अब पूरी तरह नए मोड़ पर खड़ी है और अगले 180 दिन तय करेंगे कि विजय “सुपरस्टार” से “राजनेता” बन पाते हैं या नहीं।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *