stock-markett.online
FII Selling: रिकॉर्ड बिकवाली से दबाव में बाजार, लेकिन इन फैक्टर्स ने दिखाई अलग तस्वीर, एक्सपर्ट ने बताया अगला ट्रिगर
FII Selling: रिकॉर्ड बिकवाली से दबाव में बाजार, लेकिन इन फैक्टर्स ने दिखाई अलग तस्वीर, एक्सपर्ट ने बताया अगला ट्रिगर

FII Selling: रिकॉर्ड बिकवाली से दबाव में बाजार, लेकिन इन फैक्टर्स ने दिखाई अलग तस्वीर, एक्सपर्ट ने बताया अगला ट्रिगर

FII Selling: भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से एक अजीब विरोधाभास का सामना कर रहा है। एक तरफ विदेशी निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी बाजार को सहारा दे रही है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर विदेशी निवेशकों की बिकवाली कब थमेगी और भारतीय बाजार दोबारा वैश्विक निवेशकों की पसंद कब बनेगा? मोतीलाल ओसवाल में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज सेल्स के प्रमुख और मैनेजिंग डायरेक्टर Gautam Duggad का मानना है कि फिलहाल भारतीय बाजार कुछ बड़े दबावों के बीच फंसा हुआ है। हालांकि, लंबी अवधि की तस्वीर अभी भी पूरी तरह नेगेटिव नहीं हुई है। उनके मुताबिक असली बदलाव तभी आएगा जब भारत में ग्रोथ की रफ्तार दोबारा मजबूत होगी।

6 महीने में ही पिछले साल से ज्यादा बिकवाली

गौतम दुग्गड़ के मुताबिक विदेशी निवेशकों की बिकवाली का मौजूदा दौर सामान्य नहीं है। उन्होंने बताया कि पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 में विदेशी निवेशकों ने करीब 20 अरब डॉलर की बिकवाली की थी, जबकि 2026 के केवल शुरुआती 6 महीनों में ही यह आंकड़ा लगभग 30 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार यह साफ संकेत है कि फिलहाल भारत के लिए वैश्विक निवेश माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल फंड फ्लो ही बाजार की दिशा तय नहीं करते, लेकिन अल्पकाल में उनका प्रभाव काफी बड़ा होता है।

क्यों पीछे हट रहे हैं विदेशी निवेशक?

दुग्गड़ के अनुसार इसके पीछे कई वजहें हैं-

  • पश्चिम एशिया में जारी जियो पॉलिटिकल टेंशन
  • ऊंची कमोडिटी कीमतें
  • रुपये पर दबाव
  • निफ्टी कंपनियों की अपेक्षाकृत कमजोर आय वृद्धि
  • एशिया के दूसरे बाजारों में बेहतर ग्रोथ

उनका मानना है कि वैश्विक पूंजी हमेशा उस जगह जाती है जहां ग्रोथ ज्यादा दिखाई देती है। पिछले दो वर्षों में कोरिया, ताइवान और कुछ दूसरे एशियाई बाजारों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों का रुझान काफी बढ़ा है, जिसका फायदा उन बाजारों को मिला।

यह भी पढ़ें- Nifty Buying Opportunity : निफ्टी वैल्युएशन कर रहा है बड़ा इशारा, आगे शेयर बाजार में मिल सकता है हाई रिटर्न

MSCI में भारत की हिस्सेदारी क्यों घटी?

हाल के वर्षों में MSCI Emerging Markets Index में भारत की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है। कभी यह 20 फीसदी के आसपास थी, जो अब घटकर लगभग 11 फीसदी के करीब पहुंच गई है। दुग्गड़ का कहना है कि यह खुद में कोई स्वतंत्र घटना नहीं है, बल्कि बाजार के अंडरपरफॉर्मेंस का रिजल्ट है। जब बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है, तब वैश्विक इंडेक्स में उसका वेटेज अपने आप बढ़ता है और जब प्रदर्शन कमजोर होता है, तब हिस्सेदारी घट जाती है। उनके अनुसार भारत को दोबारा वैश्विक निवेशकों की पसंद बनने के लिए पहले अपनी ग्रोथ स्टोरी को मजबूत करना होगा।

कॉर्पोरेट मुनाफा GDP के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर

बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत कॉर्पोरेट प्रॉफिट टू GDP रेशियो है। दुग्गड़ ने बताया कि 2020 में यह आंकड़ा सिर्फ 2 फीसदी के आसपास था, जो अब बढ़कर करीब 5.7 फीसदी तक पहुंच गया है। यह भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर के इतिहास के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। अगर केवल निफ्टी 500 कंपनियों की बात करें तो:

  • FY20 में कुल मुनाफा करीब 4 लाख करोड़ रुपये था
  • FY26 में यह बढ़कर लगभग 18 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया

यानी 6 साल में कॉर्पोरेट मुनाफा साढ़े चार गुना से ज्यादा बढ़ चुका है।

यह भी पढ़ें- ट्रंप के 30 दावों पर हिचकोले खाता रहा शेयर बाजार, नए ऐलान के बाद क्या लग जाएगा ब्रेक? एक्सपर्ट ने बताई पूरी कहानी

किन सेक्टरों ने बढ़ाया कॉर्पोरेट मुनाफा?

कॉर्पोरेट प्रॉफिट टू GDP रेशियो में सुधार के पीछे पांच बड़े सेक्टरों की अहम भूमिका रही है। इनमें बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं (BFSI), ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, मेटल्स और आईटी शामिल हैं। दुग्गड़ के मुताबिक इन पांच सेक्टरों का कुल कॉर्पोरेट मुनाफे में लगभग 75 फीसदी से ज्यादा योगदान है।

मिडकैप कंपनियां क्यों कर रही हैं बेहतर प्रदर्शन?

निफ्टी की तुलना में मिडकैप कंपनियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। उन्होंने बताया कि FY26 में निफ्टी की आय वृद्धि करीब 5 फीसदी रही जबकि व्यापक बाजार (Broader Market) में आय वृद्धि लगभग 15 फीसदी रही कई मिडकैप कंपनियों ने 30 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की। उनके अनुसार यही वजह है कि मिडकैप शेयर अपेक्षाकृत महंगे दिखने के बावजूद निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।

क्या मिडकैप वैल्यूएशन वाजिब हैं?

दुग्गड़ का मानना है कि भारत एक ग्रोथ-ड्रिवन मार्केट है। उनके मुताबिक अगर कोई कंपनी 20-25 फीसदी या उससे अधिक की दर से ग्रोथ दिखा रही है तो निवेशक उसे ऊंचा प्रीमियम देने को तैयार रहते हैं। वहीं जिन कंपनियों की ग्रोथ 10 फीसदी से कम है, उन्हें बाजार ज्यादा महत्व नहीं देता। यही वजह है कि कई मिडकैप कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन अभी भी निवेशकों को स्वीकार्य हैं।

बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?

दुग्गड़ ने लंबी अवधि के जोखिमों पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक पिछले एक दशक में भारतीय शेयर बाजार को तीन बड़े सहारे मिले:

  • मजबूत कॉर्पोरेट ग्रोथ
  • घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी
  • वैश्विक लिक्विडिटी का समर्थन

अगर इनमें से किसी भी स्तंभ में कमजोरी आती है तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने खास तौर पर घरेलू निवेशकों के उत्साह को लेकर चेतावनी दी। उनका कहना है कि अगर लंबे समय तक निवेशकों को कम रिटर्न मिलता है तो इक्विटी में निवेश का आकर्षण घट सकता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *