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जब एक कुत्ते की वजह से दो देशों में छिड़ गया यु्द्ध! दोनों तरफ मारे गए दर्जनों लोग
जब एक कुत्ते की वजह से दो देशों में छिड़ गया यु्द्ध! दोनों तरफ मारे गए दर्जनों लोग

जब एक कुत्ते की वजह से दो देशों में छिड़ गया यु्द्ध! दोनों तरफ मारे गए दर्जनों लोग

यह सुनने में बहुत अजीब लग सकता है कि कभी किसी कुत्ते की वजह से दो देशों में युद्ध छिड़ गया, मगर यह सच है। कहानी बड़ी अनोखी है कि एक कुत्ता सरहद पार कर गया, सिपाही पीछे दौड़ा, गोलियां चलीं और दो देश युद्ध के कगार पर आ खड़े हुए।

ये बात साल 1925 की है। बाल्कन क्षेत्र में ग्रीस और बुल्गारिया के बीच तनाव उस खिंची हुई डोरी की तरह था, जो किसी भी वक्त टूट सकती थी। बाल्कन युद्धों और पहले विश्वयुद्ध ने इस इलाके को बुरी तरह तोड़ दिया था। सीमा पर दोनों तरफ भारी-भरकम फौज तैनात थी और छोटी-छोटी झड़पें आम बात थीं।

फिर इसी बीच एक दिन एक कुत्ता सीमा पार कर बुल्गारिया की तरफ चला गया। सुनने में ये बहुत आम सी घटना लगती है, लेकिन इस घटना ने दो देशों के बीत युद्ध छिड़वा दिया।

पहली चिंगारी तब भड़की जब एक ग्रीक सैनिक का कुत्ता बुल्गारिया की सीमा में घुस गया। सैनिक उसे वापस लाने दौड़ा, ये देखकर बुल्गारी सेंट्रीज ने उस पर गोली चला दी और सैनिक मारा गया। बताया जाता है कि ये मामला तब और बढ़ गया, जब इस घटना की जांच करने गया एक और ग्रीक अफसर भी गोलीबारी में घायल हो गया। ये देख कर ग्रीस की सेना में गुस्से की लहर दौड़ गई।

फिर ग्रीस ने किया हमला

ग्रीस ने पेट्रिच के पास सीमा पार करके बुल्गारिया पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। दूसरी तरफ बुल्गारी फौज ने भी मोर्चा संभाल लिया। दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलीबारी जारी रही। दर्जनों लोग मारे गए, नागरिक इलाका छोड़ कर भागे।

लीग ऑफ नेशंस ने थामी बागडोर

इस जंग से यूरोप में हलचल मच गई। लीग ऑफ नेशंस को इसमें तेजी से दखल देना पड़ा। लीग ऑफ नेशंस पहले विश्व युद्ध के बाद विश्व शांति और सहयोग स्थापित करने के लिए बनाया गया पहला अंतर्राष्ट्रीय संगठन था। इसे 10 जनवरी 1920 को पेरिस शांति सम्मेलन के माध्यम से स्थापित किया गया था, और बाद में दूसरे विश्व युद्ध को रोकने में असमर्थ रहने के कारण 20 अप्रैल 1946 को इसे भंग कर दिया गया।

इस संगठन ने दोनों तरफ जांचकर्ता भेजे, दोनों देशों पर दबाव बनाया। ग्रीस को अपनी फौजें वापस बुलानी पड़ीं और बाद में बुल्गारिया को हर्जाना भी देना पड़ा।

क्या सच में एक कुत्ते ने युद्ध करवाया?

इतिहासकार कहते हैं- नहीं, पूरी तरह नहीं। कुत्ता तो बस वो आखिरी जरिया था, जिसने दोनों तरफ उबल रहे ज्वालामुखी को और भड़का दिया। असली आग तो पहले से सुलग रही थी- दशकों की दुश्मनी, टूटी संधियां, और सीमा पर खड़ी भूखी फौजें। कुत्ता तो बस “ट्रिगर” बना।

यह कहानी आज भी क्यों याद की जाती है?

इस “War of the Stray Dog” की कहानी सौ साल बाद भी इसलिए जिंदा है, क्योंकि यह हमें एक बड़ी सच्चाई याद दिलाती है- दुनिया की सबसे बड़ी तबाहियां भी अक्सर बेहद मामूली कारणों से शुरू होती हैं।

पहले विश्वयुद्ध की शुरुआत एक हत्या से हुई थी। इस बार एक आवारा कुत्ते ने युद्ध की आंच जला दी। और शायद इसीलिए यह किस्सा इतिहास की किताबों में “सबसे अजीब राजनयिक संकटों” में से एक के रूप में दर्ज है।

लीग ऑफ नेशंस ने इस संकट में जो भूमिका निभाई, वह उस दौर के लिए बड़ी बात थी। अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीति ने एक और बड़े युद्ध को रोक दिया- यह दिखाता है कि बातचीत और संगठित अंतरराष्ट्रीय ढांचा काम कर सकता है।

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