Mohnish Pabrai Quotes: बाजार में बड़े-बड़े कैलकुलेशन भी हो सकते हैं फेल? दिग्गज निवेशक पबराय ने बताया बड़ा सच
Mohnish Pabrai Quotes: शेयर बाजार में अक्सर लोग मानते हैं कि बड़े से बड़े फॉर्मूलों और कैलकुलेशन के जरिए भविष्य का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि, मशहूर वैल्यू इन्वेस्टर मोहनीश पबराय का मानना इसके बिल्कुल उलट है। उनका कहना है – “Investing is not a discipline based on absolutes or precise mathematics. There simply aren’t enough data points available to work out the exact odds.”।
इसका मतलब है कि निवेश कोई ऐसा अनुशासन नहीं है, जो सटीक गणित या अटल नियमों पर टिका हो, क्योंकि बाजार में सटीक संभावनाओं का कैलकुलेशन करने के लिए पर्याप्त डेटा मौजूद ही नहीं होते हैं। पबराय की ये सोच बताती है कि वित्तीय बाजार भौतिकी या इंजीनियरिंग की तरह काम नहीं करते जहां हर क्रिया का एक तय नतीजा हो।
शेयर बाजार लोगों की भावनाओं, अचानक होने वाली घटनाओं और अनिश्चितता से चलता है। इसलिए जो लोग सिर्फ आंकड़ों और फॉर्मूलों पर भरोसा करते हैं, वे बाजार की असली चाल को समझ नहीं पाते।
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सटीक गणित के भ्रम से बाहर निकलें
बाजार में बैलेंस शीट, पीई रेश्यो और ग्रोथ रेट जैसे आंकड़े बहुत उपयोगी होते हैं, लेकिन वे पूरी तस्वीर पेश नहीं करते। कोई भी कंप्यूटर मॉडल यह सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि आने वाले पांच सालों में किसी कंपनी का नया उत्पाद सफल होगा या नहीं, या सरकार की नीतियां कैसे बदलेंगी। जब डेटा सीमित और परिस्थितियां परिवर्तनशील हों, तो दशमलव के दो अंकों तक सटीक रिटर्न का अनुमान लगाना केवल एक भ्रम साबित होता है।
मान लीजिए दो निवेशक, राहुल और अमित, एक उभरती हुई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कंपनी का अध्ययन कर रहे हैं। राहुल जटिल एक्सेल स्प्रेडशीट बनाता है और यह मान लेता है कि कंपनी अगले दस सालों तक हर साल ठीक 25 फीसदी की दर से बढ़ेगी। वह कच्चे माल की लागत, मांग और ब्याज दरों का एक सटीक फॉर्मूला तैयार करता है।
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दूसरी तरफ, मोहनीश पबराय के सिद्धांत को अपनाता है। वह जानता है कि भविष्य अनिश्चित है। हो सकता है कि नई बैटरी तकनीक आ जाए, सब्सिडी खत्म हो जाए या वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर की कमी हो जाए। इसलिए अमित सटीक गणना करने के बजाय एक मोटा अनुमान लगाता है। वह देखता है कि कंपनी का मैनेजमेंट मजबूत है, कर्ज कम है और शेयर अपनी वास्तविक कीमत से काफी सस्ते भाव पर मिल रहा है।
कुछ समय बाद अगर बाजार में अचानक ब्याज दरें बढ़ जाती हैं और EV सेक्टर की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो राहुल का पूरा सटीक गणित ध्वस्त हो जाता है और उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, अमित ने पहले ही अनिश्चितता को स्वीकार किया था और सस्ते भाव पर खरीदकर ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ रखी थी, जिससे उसका निवेश सुरक्षित रहता है और लंबे समय में वह बेहतर मुनाफा कमाता है।
(Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।)

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