SCSS : रिटायरमेंट सेविंग से मंथली 41,000 रुपये का इंतजाम, किराये के घर से बेहतर है SCSS स्कीम, समझिए कैसे?
SCSS : रिटायरमेंट के बाद हर महीने होने वाली आमदनी सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है। नौकरी खत्म होने के बाद वेतन आना बंद हो जाता है, लेकिन घर का खर्च, बिजली-पानी का बिल, दवाइयां और दूसरी जरूरतें बनी रहती हैं। ऐसे में कई लोग अपनी जमा पूंजी से किराये का मकान बनाकर नियमित आमदनी जुटाने की योजना बनाते हैं। हालांकि किराये की आमदनी हर महीने एक जैसी मिले, यह जरूरी नहीं है। मकान कुछ समय खाली रह सकता है, किरायेदार बदल सकता है और मरम्मत या रखरखाव पर खर्च भी करना पड़ सकता है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिक बचत योजना यानी एससीएसएस रिटायरमेंट के बाद नियमित आय (retirement planning) का एक विकल्प हो सकती है।
फिलहाल इस योजना पर 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है। एक व्यक्ति इसमें अधिकतम 30 लाख रुपये जमा कर सकता है। अगर पति और पत्नी दोनों इस योजना में निवेश के लिए पात्र हैं और दोनों अपने-अपने खाते में 30-30 लाख रुपये जमा करते हैं, तो कुल 60 लाख रुपये निवेश किए जा सकते हैं। 60 लाख रुपये पर 8.2 प्रतिशत की दर से सालाना 4.92 लाख रुपये ब्याज बनता है। इसे 12 महीनों में बांटें तो यह औसतन करीब 41,000 रुपये महीने के बराबर बैठता है।
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हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। एससीएसएस में ब्याज हर महीने नहीं मिलता, बल्कि हर तीन महीने में एक बार खाते में जमा होता है। यानी 60 लाख रुपये पर करीब 1.23 लाख रुपये हर तिमाही मिल सकते हैं। महीने के हिसाब से देखें तो यह करीब 41,000 रुपये की औसत आय के बराबर है। इसी तरह अगर कोई एक व्यक्ति 30 लाख रुपये निवेश करता है, तो उसे सालाना करीब 2.46 लाख रुपये ब्याज मिलेगा। यानी हर तिमाही करीब 61,500 रुपये और महीने के हिसाब से औसतन करीब 20,500 रुपये।
इस योजना की एक खास बात यह है कि अगर निवेशक मूलधन नहीं निकालता और केवल ब्याज का इस्तेमाल करता है, तो सामान्य स्थिति में मूल 60 लाख रुपये निवेश की अवधि के दौरान बना रहता है। हालांकि इसे हमेशा के लिए मिलने वाली 8.2 प्रतिशत ब्याज दर नहीं समझना चाहिए। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें सरकार समय-समय पर तय करती है, इसलिए भविष्य में दर बदल सकती है।
एससीएसएस मुख्य रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए है। कुछ विशेष परिस्थितियों में 55 से 60 वर्ष के बीच के सेवानिवृत्त लोग भी इसमें निवेश कर सकते हैं। खाता डाकघर और अधिकृत बैंकों में खोला जा सकता है। योजना की सामान्य अवधि पांच साल होती है और नियमों के अनुसार इसे आगे बढ़ाने का विकल्प भी मिलता है।
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कर के लिहाज से भी कुछ बातें समझना जरूरी हैं। इस योजना में किया गया निवेश पुरानी कर व्यवस्था में धारा 80सी के तहत निर्धारित सीमा तक कर कटौती के लिए पात्र हो सकता है। वहीं, एससीएसएस से मिलने वाला ब्याज कर योग्य होता है। इसलिए 41,000 रुपये की मासिक औसत आय को पूरी तरह कर-मुक्त या हाथ में आने वाली शुद्ध रकम नहीं माना जा सकता।
इसलिए रिटायरमेंट के बाद किराये की संपत्ति और एससीएसएस में से किसी एक को चुनने से पहले केवल मिलने वाली आमदनी नहीं, बल्कि जोखिम, महंगाई, कर, रखरखाव और पैसे की जरूरत को भी देखना चाहिए। 60 लाख रुपये के एससीएसएस निवेश पर मौजूदा 8.2 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से करीब 41,000 रुपये महीने की औसत आय का गणित सही है, लेकिन वास्तविक भुगतान तिमाही आधार पर होगा और भविष्य की ब्याज दर बदल सकती है।
(Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, न कि निवेश की सलाह है। यह ET NOW Swadesh के निजी विचार भी नहीं हैं। अपने पाठकों और दर्शकों को ET NOW Swadesh पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है। )

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