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48 घंटे से भी कम समय में पश्चिम बंगाल को नया CM देने जा रही BJP, इस बीच इस्तीफा नहीं देने पर अड़ीं ममता का क्या होगा?

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब लोगों की निगाहें अगले मुख्यमंत्री के चेहरे पर है। बीते 15 साल से सूबे की मुख्यमंत्री रही ममता बनर्जी को 2026 के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। वहीं इन चुनावों में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है। जानकारी के मुताबिक, अगले 48 घंटे में भारतीय जनता पार्टी राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर सकती है। वहीं अभी ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा ना देने की बात कहकर सूबे का सियासी पारा और भी हाई कर दिया है।

अगले 48 घंटे में राज्य को मिलेगा नया सीएम

बता दें कि, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बताया कि 8 मई को शाम 4 बजे विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में विधायक दल के नेता का चुनाव होगा। इसके बाद 9 मई को सुबह 10 बजे नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस समारोह में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और देश के 20 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गुरुवार शाम पश्चिम बंगाल पहुंचने का कार्यक्रम तय किया गया है। यह दौरा राज्य में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। बीजेपी के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह पहले बिहार में होने वाले कैबिनेट विस्तार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इसके बाद वह सीधे पश्चिम बंगाल के लिए रवाना होंगे। पार्टी के लिए उनका यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस समय बीजेपी सरकार गठन और चुनाव के बाद की रणनीति को लेकर लगातार बैठकें कर रही है।

इस्तीफा ना देने पर अड़ी ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सत्ता में वापसी के एक दिन बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने मतगणना प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने दावा किया कि करीब 100 सीटों पर उनकी पार्टी का जनादेश “छीन लिया गया”। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना की प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया गया, ताकि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर किया जा सके। ममता बनर्जी ने कहा, “मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हम जनता के फैसले से नहीं, बल्कि एक साजिश की वजह से हारे हैं। मैं खुद को हारा हुआ नहीं मानती। मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी। वे संवैधानिक नियमों के मुताबिक जो कार्रवाई करनी है, कर सकते हैं।”

अब बंगाल में आगे क्या हो सकता है?

अगर ममता बनर्जी बहुमत नहीं होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर बनी रहती हैं, तो राज्यपाल आगे कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में राज्यपाल सरकार को बर्खास्त करने या विधानसभा में फ्लोर टेस्ट यानी विश्वास मत साबित करने के लिए कह सकते हैं। जब तक नई सरकार आधिकारिक रूप से शपथ नहीं ले लेती, तब तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) का पद तकनीकी रूप से खाली माना जाता है। हालांकि, कई मामलों में नया सदन बनने तक मौजूदा विपक्षी नेता अपने पद पर बने रह सकते हैं।

कानून क्या कहता है?

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक नहीं, बल्कि वैधानिक पद माना जाता है। इसका मतलब है कि यह पद कानून के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार दिया जाता है। नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति में विपक्षी दल और विधानसभा अध्यक्ष दोनों की अहम भूमिका होती है। नेता प्रतिपक्ष (LoP) का पद पाने के लिए किसी भी राजनीतिक दल को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि वह दल विधानसभा में सरकार से बाहर सबसे बड़ा राजनीतिक समूह होना चाहिए। यानी वह विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होनी चाहिए। दूसरी अहम शर्त यह मानी जाती है कि पार्टी के पास सदन की कुल सीटों का कम से कम 10 प्रतिशत समर्थन होना चाहिए।

टीएमसी को मिल सकती है नेता प्रतिपक्ष की सीट

पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। ऐसे में किसी पार्टी को आधिकारिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष का दावा करने के लिए कम से कम 30 सीटों की जरूरत होगी। हालांकि, कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष के पास विशेष अधिकार होते हैं। अगर वह चाहें, तो 10 प्रतिशत से कम सीटें होने के बावजूद भी सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे सकते हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए योग्य मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी के पास विधानसभा में पर्याप्त सीटें हैं।

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल के लिए बीजेपी का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को असम में बीजेपी विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है, जबकि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।

बीजेपी ने विधानसभा चुनाव 2026 में बड़ा इतिहास रचा है। पार्टी पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है। वहीं, बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन ने असम में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 206 सीटों पर जीत हासिल की है। यह 2021 विधानसभा चुनाव में मिली 77 सीटों से काफी ज्यादा है। दूसरी ओर, पिछली बार 212 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस इस बार सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई।

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