Credit Card : एक प्रीमियम कार्ड बेहतर या कई क्रेडिट कार्ड? कैशबैक, रिवार्ड, ऑफर देखकर अप्लाई करने से पहले लें डिटेल
Credit Card: क्रेडिट कार्ड चुनते समय चमकदार ऑफर और प्रीमियम सुविधाएं आसानी से आकर्षित करती हैं। एयरपोर्ट लाउंज, होटल में फायदे, रिवॉर्ड पॉइंट्स और डिस्काउंट देखकर लगता है कि महंगा कार्ड (premium credit card) ही ज्यादा फायदेमंद होगा। लेकिन क्रेडिट कार्ड की असली कीमत उसके फीचर्स की लंबी लिस्ट में नहीं, बल्कि इस बात में है कि आप उनमें से कितना इस्तेमाल करते हैं।
कई बार 5,000 या 10,000 रुपये एनुअल फीस वाला प्रीमियम कार्ड रखने के बजाय कम फीस या बिना सालाना शुल्क वाला बेसिक कार्ड आपकी जेब के लिए बेहतर हो सकता है। दूसरी ओर, अगर आप लगातार यात्रा करते हैं, होटल में ठहरते हैं और इतना खर्च करते हैं कि कार्ड के ज्यादातर फायदे हासिल कर सकें, तो प्रीमियम कार्ड अपनी फीस की भरपाई कर सकता है। इसलिए फैसला कार्ड देखकर नहीं, अपने खर्च देखकर करें।
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पहले देखें, आपका पैसा कहां खर्च होता है
- क्रेडिट कार्ड चुनने का सबसे आसान तरीका है कि पिछले कुछ महीनों के अपने खर्च पर नजर डालें। अगर आपका ज्यादातर खर्च किराना, खाना पीना, पेट्रोल, ऑनलाइन शॉपिंग और रोजमर्रा की खरीदारी पर होता है, तो आपके लिए अच्छा कैशबैक या रिवॉर्ड कार्ड पर्याप्त हो सकता है।
- ऐसे में सिर्फ एयरपोर्ट लाउंज या होटल जैसी सुविधाओं के लिए महंगा प्रीमियम कार्ड लेना जरूरी नहीं है। अगर आप इन सुविधाओं का इस्तेमाल ही नहीं करते, तो उनके लिए सालाना फीस चुकाने का कोई खास आर्थिक फायदा नहीं है।
- इसके उलट, अगर आप अक्सर फ्लाइट से सफर करते हैं, होटल में रुकते हैं या कार्ड पर पर्याप्त खर्च करते हैं, तो प्रीमियम कार्ड पर मिलने वाले लाउंज एक्सेस, होटल बेनिफिट्स और ज्यादा वैल्यू वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं।
- लेकिन यहां एक गलती से बचना जरूरी है। कार्ड जारी करने वाली कंपनी जितने फायदे गिनाए, उन सभी को जोड़कर यह न मान लें कि आपको उतनी रकम का फायदा मिल रहा है। जिस सुविधा का इस्तेमाल ही नहीं हुआ, उसकी आपके लिए वास्तविक आर्थिक कीमत नहीं है।
एक प्रीमियम कार्ड बेहतर या कई बेसिक कार्ड?
कुछ लोगों के लिए एक से ज्यादा बेसिक कार्ड रखना भी फायदेमंद हो सकता है। मसलन, एक कार्ड पर ऑनलाइन शॉपिंग के लिए बेहतर कैशबैक मिल रहा हो, जबकि दूसरा पेट्रोल या डाइनिंग पर ज्यादा रिवॉर्ड देता हो। ऐसे में अलग अलग खर्च के लिए सही कार्ड चुनकर आप अपने रिवॉर्ड बढ़ा सकते हैं। लेकिन ज्यादा कार्ड का मतलब ज्यादा जिम्मेदारी भी है। हर कार्ड का अलग बिल, भुगतान की तारीख, सालाना फीस, रिवॉर्ड प्रोग्राम और लॉगिन हो सकता है। अगर इन्हें संभालना मुश्किल हो जाए और किसी कार्ड का भुगतान समय पर न हो, तो रिवॉर्ड का फायदा बहुत छोटा और नुकसान काफी बड़ा हो सकता है। इसी वजह से सिर्फ ज्यादा रिवॉर्ड पाने के लिए कई कार्ड रखने के बजाय उतने ही कार्ड रखें, जिन्हें आप आसानी से मैनेज कर सकें। CIBIL भी उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के आधार पर कार्ड चुनने की सलाह देता है और बहुत ज्यादा कार्ड होने से क्रेडिट एक्सपोजर बढ़ने तथा उन्हें संभालना मुश्किल होने की बात कहता है।
ज्यादा कार्ड से क्रेडिट यूटिलाइजेशन कैसे बदलता है?
एक से ज्यादा कार्ड रखने के पीछे क्रेडिट यूटिलाइजेशन भी एक वजह हो सकती है। इसे आसान उदाहरण से समझिए।
- मान लीजिए आप हर महीने क्रेडिट कार्ड से 30,000 रुपये खर्च करते हैं। अगर आपके पास सिर्फ एक कार्ड है और उसकी क्रेडिट लिमिट 50,000 रुपये है, तो आपका यूटिलाइजेशन 60% होगा।
- अब मान लीजिए आपके पास दो या अधिक कार्ड हैं और उनकी कुल क्रेडिट लिमिट 2 लाख रुपये है। उसी 30,000 रुपये के खर्च पर यूटिलाइजेशन करीब 15% होगा, बशर्ते पूरा खर्च उसी तरह रिपोर्ट हो।
- आम तौर पर बहुत ज्यादा क्रेडिट utilisation आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए बड़ी क्रेडिट लिमिट मिलने का मतलब यह नहीं है कि आपको ज्यादा खर्च करना चाहिए। क्रेडिट लिमिट सुविधा है, अतिरिक्त आय नहीं।
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सालाना फीस का हिसाब लगाना न भूलें
प्रीमियम कार्ड चुनने से पहले सबसे जरूरी गणना है कि आपको सालभर में वास्तविक फायदा कितना मिलेगा और फीस कितनी देनी होगी। मान लीजिए किसी कार्ड की सालाना फीस 5,000 रुपये है। अगर पूरे साल इस्तेमाल के बाद आपको मिलने वाले कैशबैक, रिवॉर्ड और वास्तव में इस्तेमाल की गई दूसरी सुविधाओं की कीमत 3,000 रुपये ही बैठती है, तो यह कार्ड आपके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं है। यह भी जांचें कि क्या तय सालाना खर्च पूरा करने पर फीस माफ हो जाती है। फीस पर लगने वाले लागू टैक्स को भी अपनी गणना में शामिल करें। यानी कार्ड के विज्ञापन में दिखने वाली संभावित वैल्यू नहीं, बल्कि अपने इस्तेमाल से मिलने वाली वास्तविक वैल्यू देखें।
पुराना कार्ड सिर्फ इसलिए बंद न करें कि नया कार्ड मिल गया है
मान लीजिए आपके पास कई साल पुराना क्रेडिट कार्ड है। आपने उसका भुगतान लगातार समय पर किया है और उस पर कोई ऐसी फीस नहीं है जो आपको परेशान कर रही हो। ऐसे में केवल वॉलेट में कार्डों की संख्या कम करने के लिए उसे बंद करना हमेशा जरूरी नहीं है। पुराना और अच्छे भुगतान रिकॉर्ड वाला खाता आपकी क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई में योगदान कर सकता है। दूसरी तरफ, अगर उस कार्ड की क्रेडिट लिमिट काफी बड़ी है और आप उसे बंद कर देते हैं, तो आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट कम हो सकती है। इससे बाकी कार्डों पर आपके क्रेडिट utilisation का अनुपात बढ़ सकता है। इसलिए पुराना कार्ड बंद करने से पहले उसके क्रेडिट इतिहास, लिमिट, फीस और आपके मौजूदा कार्डों पर संभावित असर को जरूर देखें।
हर नए क्रेडिट कार्ड के ऑफर पर न जाएं
आजकल नए क्रेडिट कार्ड के ऑफर लगातार आते रहते हैं। लेकिन हर नया कार्ड लेना जरूरी नहीं है। नए कार्ड के लिए आवेदन करने पर बैंक या कार्ड जारी करने वाली संस्था आपकी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच कर सकती है। इसे क्रेडिट इंक्वायरी कहा जाता है। कम समय में कई क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर असर पड़ सकता है। इसलिए केवल आकर्षक रिवॉर्ड या सीमित अवधि के ऑफर को देखकर आवेदन करने के बजाय पहले यह देखें कि क्या कार्ड आपकी जरूरत के हिसाब से सही है।
तो आपके लिए कौन सा क्रेडिट कार्ड सही है?
इसका कोई एक जवाब सभी लोगों के लिए नहीं हो सकता। अगर आपका खर्च मुख्य रूप से रोजमर्रा की खरीदारी पर है, तो कम फीस वाला अच्छा कैशबैक या रिवॉर्ड कार्ड पर्याप्त हो सकता है। अगर आप लगातार यात्रा करते हैं और प्रीमियम सुविधाओं का नियमित इस्तेमाल करते हैं, तो प्रीमियम कार्ड बेहतर वैल्यू दे सकता है। वहीं, अगर आपके अलग अलग खर्चों पर अलग कार्ड बेहतर रिवॉर्ड देते हैं और आप कई कार्डों के बिल समय पर संभाल सकते हैं, तो कुछ बेसिक कार्ड का संयोजन भी काम आ सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि सबसे अच्छा क्रेडिट कार्ड वह नहीं है जिसकी लिमिट सबसे ज्यादा या फीचर्स सबसे ज्यादा हों। बेहतर कार्ड वह है जो आपकी जरूरत के मुताबिक रिवॉर्ड दे, उसकी फीस आपके इस्तेमाल के हिसाब से उचित हो और आप उसके बिल का भुगतान समय पर कर सकें। क्रेडिट कार्ड का फायदा तभी है जब रिवॉर्ड और सुविधाओं से मिलने वाली वैल्यू आपके खर्च और फीस से मेल खाए। वरना ज्यादा फीचर्स वाला कार्ड सिर्फ ज्यादा खर्च और ज्यादा जिम्मेदारी बन सकता है।
(Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, न कि निवेश की सलाह है। यह ET NOW Swadesh के निजी विचार भी नहीं हैं। अपने पाठकों और दर्शकों को ET NOW Swadesh पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है। )

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