FPI Outflow: अक्टूबर में विदेशी निवेशकों ने निकाले 48,056 करोड़ रुपये, इस साल कुल निकासी 3 लाख करोड़ के पार
FPI Outflow October 2026: वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का शेयर बाजार से निकासी का सिलसिला बदस्तूर जारी है। अक्टूबर महीने में विदेशी निवेशकों ने अब तक घरेलू इक्विटी बाजार से 48,056 करोड़ रुपये की भारी रकम निकाली है।
क्रूड की बढ़ती कीमतों, वैश्विक स्तर पर महंगाई की नई लहर और घरेलू कंपनियों के सुस्त तिमाही नतीजों ने विदेशी निवेशकों की धारणा को लगातार प्रभावित किया है। हालांकि, हाल के दिनों में बिकवाली की इस तेज रफ्तार पर कुछ हद तक लगाम लगी है।
पिछले हफ्ते के दौरान विदेशी निवेशकों की निकासी की गति में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली, जहां वे 2 कारोबारी सत्रों में नेट बॉयर्स भी बने रहे। इसके बावजूद, अक्टूबर की ताजा बिकवाली के साथ चालू कैलेंडर वर्ष 2026 में शेयर बाजार से एफपीआई की कुल निकासी बढ़कर 3.08 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है, जो पिछले साल 2025 की कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी अधिक है।
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लगातार बिकवाली की खास वजह
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से पहले सितंबर में भी एफपीआई ने 35,861 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। जबकि इससे पहले जुलाई में 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का नेट इन्वेस्ट किया था।
पीटीआई ने चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ के हवाले से रिपोर्ट में बताया कि इस बिकवाली के प्रमुख फैक्टर्स में क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें शामिल हैं, जो पश्चिम एशिया संकट के चलते 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई थीं। इसके अलावा, घरेलू बाजार में लिक्विडिटी को लेकर बनी अनिश्चितता और 30,213 करोड़ रुपये के जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ ने भी सेकेंडरी मार्केट से कैश को अस्थायी रूप से प्रभावित किया। ग्लोबल पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग की वजह से भी भारतीय इक्विटी पर बिकवाली का दबाव बढ़ा।
घरेलू निवेशकों का सहारा
एक्सपर्ट का मानना है कि निकासी के आंकड़े सतही तौर पर चिंताजनक जरूर दिखते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति उतनी गंभीर नहीं है। भारतीय बाजारों में एफपीआई की हिस्सेदारी पहले ही कई वर्षों के निचले स्तर पर आ चुकी है, जिसे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने संतुलित किया है।
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साथ ही, आईपीओ बाजार में एफपीआई का एक्टिव रहना दर्शाता है कि वे भारत से पूरी तरह बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि अपने पोर्टफोलियो को नए अवसरों में पुनर्गठित कर रहे हैं। शेयर बाजार के साथ-साथ अक्टूबर में एफपीआई डेट या बॉन्ड बाजार में भी नेट सेलर्स रहे। एफएआर के तहत 3,858 करोड़ रुपये और वीआरआर के तहत 1,332 करोड़ रुपये निकाले गए, जबकि सामान्य मार्ग के जरिए 3,737 करोड़ रुपये का कैश आउटफ्लो दर्ज किया गया।
(Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।)

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