Gold Silver Price Outlook: सोने-चांदी में आने वाली है बड़ी तेजी? दीवाली और शादी सीजन तक 10-12% तक तेजी का अनुमान, एक्सपर्ट की राय
Gold Silver Price Outlook: सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिवाली और शादी के सीजन में आमतौर पर इनकी मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में सवाल है कि क्या आने वाले दिनों में सोने-चांदी के भाव में फिर तेजी आएगी? फेस्टिव सीजन में इनकी कीमतों का रुख कैसा रह सकता है और जूलरी की मांग कितनी बढ़ने की उम्मीद है? इन सभी सवालों पर इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता की राय आइए जानते हैं।
सोने में कितनी तेजी की उम्मीद, कहां तक जा सकता है भाव?
सोने की कीमतों पर दबाव की एक बड़ी वजह ऊंची बॉन्ड यील्ड रही है। लेकिन अब बॉन्ड यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता की संभावना को देखते हुए सुरेंद्र मेहता को सोने में बड़ी गिरावट की गुंजाइश सीमित नजर आ रही है। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में सोने में जोखिम के मुकाबले संभावित रिटर्न बेहतर दिख रहा है। मेहता के मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने में करीब 4-5% तक गिरावट का जोखिम है, जबकि तेजी की स्थिति में 12-13% तक का रिटर्न मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना है। वहीं, गिरावट की स्थिति में यह 3,850 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है। उनका यह अनुमान 30 नवंबर तक की अवधि के लिए है। घरेलू बाजार की बात करें तो मेहता के अनुमान के मुताबिक, नवंबर के अंत तक सोने का भाव जीएसटी के बिना करीब 1,54,000 रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह लक्ष्य बाजार की परिस्थितियों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगा।
चांदी में भी तेजी की उम्मीद
सोने के साथ चांदी की कीमतों को लेकर भी मेहता का रुख सकारात्मक है। उनके मुताबिक, अगर वैश्विक परिस्थितियों में सुधार जारी रहता है और डॉलर इंडेक्स व बॉन्ड यील्ड में नरमी बनी रहती है, तो नवंबर के अंत तक चांदी का भाव 2.35 लाख से 2.40 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। इस अनुमान के मुताबिक, सोने और चांदी दोनों में हालिया गिरावट के बाद तेजी की गुंजाइश बन सकती है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि वैश्विक आर्थिक हालात, डॉलर की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम की दिशा कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
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सोने की कीमतों पर दबाव क्यों बना था?
सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, सोने की कीमतों पर दबाव की प्रमुख वजह ऊंची बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में मजबूती रही है। अब अगर इन दोनों में नरमी आती है और वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसी स्थिति दोबारा नहीं बनती, तो सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है। यानी आगे सोने की चाल इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि डॉलर और बॉन्ड यील्ड किस दिशा में जाते हैं और दुनिया के प्रमुख बाजारों में तनाव कितना कम होता है। इन मोर्चों पर राहत मिलने की स्थिति में सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
दिवाली और शादी के सीजन में कैसी रहेगी जूलरी की मांग?
सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर जूलरी बाजार पर भी पड़ता है। सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, हालिया गिरावट के बावजूद इस बार फेस्टिव सीजन में ग्राहकों की खरीदारी का उत्साह अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दिया है। इसकी एक वजह यह भी है कि जब कीमतें गिरती हैं, तो कई खरीदार और निवेशक और गिरावट का इंतजार करने लगते हैं। वहीं, कीमतों में तेजी शुरू होने पर खरीदारी बढ़ने लगती है। मेहता का अनुमान है कि दशहरे के आसपास जूलरी बाजार में खरीदारी की रफ्तार बढ़ सकती है। इसके बाद दिवाली और शादी के सीजन में मांग को और सहारा मिलने की उम्मीद है। पिछले तीन-चार महीनों में सोना खरीदने को लेकर जो उत्साह कुछ हद तक कमजोर पड़ा था, वह अनुकूल वैश्विक परिस्थितियों में फिर लौट सकता है। उनके मुताबिक, अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है, तो जूलरी की मांग बढ़ने की संभावना है। फेस्टिव सीजन के बाद शादी का सीजन भी शुरू होगा, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।
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खरीदारों के लिए क्या है संकेत?
IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के अनुमान में नवंबर के अंत तक सोने और चांदी, दोनों की कीमतों में तेजी की संभावना दिखाई दे रही है। सोने के लिए उनका घरेलू लक्ष्य करीब 1,54,000 रुपये और चांदी के लिए 2.35 लाख से 2.40 लाख रुपये प्रति किलो है। साथ ही, उन्हें जूलरी बाजार में भी दशहरे के बाद खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि कीमतों में तेजी का अनुमान वास्तविक तेजी की गारंटी नहीं है। शादी या त्योहार के लिए जूलरी खरीदने वालों को अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से फैसला लेना चाहिए। वहीं, निवेश के लिहाज से सोना-चांदी खरीदने से पहले कीमतों में उतार-चढ़ाव और संभावित जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।

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