IDBI Bank Disinvestment: बातचीत के आखिरी दौर में सरकार! कनाडा की इस कंपनी को बोली हो सकती है मंजूर- सोर्स
IDBI Bank Disinvestment: कई वर्षों से अटकी IDBI Bank के निजीकरण की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक, कनाडा की वित्तीय सेवा कंपनी Fairfax Financial Holdings की संशोधित पेशकश पर केंद्र सरकार सकारात्मक रुख अपना सकती है। सूत्रों के अनुसार, Fairfax अपनी प्रति शेयर बोली में कुछ रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है, जिसके बाद सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के करीब पहुंच गई है। हालांकि, इस सौदे को अंतिम रूप देने से पहले केंद्रीय कैबिनेट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी जरूरी होगी।
पहली बोली रिजर्व प्राइस से कम थी
रिपोर्ट्स के अनुसार, Fairfax ने पहले IDBI Bank के लिए जो बोली लगाई थी, वह सरकार के तय किए गए रिजर्व प्राइस से कम थी। इसी वजह से उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया था। इसके बाद सरकार ने बैंक का दोबारा मूल्यांकन कराया और संभावित खरीदारों से संशोधित प्रस्ताव मांगे।
अब माना जा रहा है कि Fairfax अपनी बोली में मामूली बढ़ोतरी कर सकती है, जिससे दोनों पक्षों के बीच मूल्यांकन का अंतर कम हो सकता है। हालांकि सरकार ने अब तक रिजर्व प्राइस का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।
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कई साल से निजीकरण की कोशिश में सरकार
केंद्र सरकार पिछले कई वर्षों से IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कर रही है। अगर यह सौदा पूरा हो जाता है, तो यह हाल के वर्षों में किसी सरकारी बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी बेचने का सबसे बड़ा विनिवेश (Disinvestment) माना जाएगा।
सरकार का लक्ष्य बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम करने के साथ-साथ प्रबंधन नियंत्रण (Management Control) भी नए खरीदार को सौंपना है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार और निजी निवेश को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति को भी मजबूती मिलेगी।
60.72% हिस्सेदारी बेचने की योजना
फिलहाल IDBI Bank में केंद्र सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 95% है। दोनों मिलकर बैंक की 60.72% हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण बेचने की योजना पर काम कर रहे हैं।
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इस प्रस्ताव के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी। इस हिस्सेदारी की बिक्री के बाद बैंक का नियंत्रण नए रणनीतिक निवेशक के पास चला जाएगा।

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