ITR Filing 2026: NPS, PPF या EPF… रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम टैक्स में सबसे ज्यादा फायदा दिलाएगी?
ITR Filing 2026: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय ज्यादातर लोग NPS, PPF और EPF में से किसी एक या एक से ज्यादा स्कीम में निवेश करते हैं। तीनों का मकसद रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना है। हालांकि, टैक्स छूट, ब्याज और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। साथ ही, यह भी मायने रखता है कि आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है या नया।
NPS में सबसे ज्यादा टैक्स छूट
अगर आप पुराना टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो NPS सबसे ज्यादा टैक्स बचाने वाली स्कीम बन सकती है।
NPS Tier-I में निवेश पर Section 80CCD(1) के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। यह सीमा Section 80C का हिस्सा है। इसके अलावा Section 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त छूट भी मिलती है। यानी NPS के जरिए कुल ₹2 लाख तक टैक्स डिडक्शन का फायदा लिया जा सकता है।
अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो अपनी तरफ से किए गए निवेश पर छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, अगर आपका नियोक्ता NPS में योगदान देता है, तो Section 80CCD(2) के तहत बेसिक सैलरी और DA के 14% तक की रकम पर टैक्स छूट मिल सकती है।
रिटायरमेंट के समय NPS की 60% रकम टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है। बाकी 40% से एन्युटी खरीदनी होती है। उस पर मिलने वाली पेंशन आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है।
PPF में पूरा टैक्स-फ्री फायदा
PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी की स्कीम माना जाता है। पुराने टैक्स रिजीम में PPF में निवेश पर Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा मिलने वाला ब्याज भी टैक्स-फ्री रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी कोई टैक्स नहीं लगता।
अगर आपने नया टैक्स रिजीम चुना है, तो नए निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगी।
EPF का फायदा नौकरीपेशा लोगों को
EPF संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है।
पुराने टैक्स रिजीम में कर्मचारी का EPF योगदान Section 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में आता है। तय शर्तें पूरी होने पर ब्याज और निकासी भी टैक्स-फ्री रहती है। हालांकि, अगर समय से पहले पैसा निकाला जाता है, तो कुछ मामलों में टैक्स देना पड़ सकता है।
पुराने और नए टैक्स रिजीम में क्या फर्क?
अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है, तो NPS, PPF और EPF तीनों में टैक्स बचाने का फायदा मिलता है। इनमें भी NPS सबसे आगे है, क्योंकि इसमें ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।
वहीं, नए टैक्स रिजीम में Section 80C की छूट नहीं मिलती। इसलिए PPF और EPF में निवेश पर टैक्स डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा। NPS में भी सिर्फ नियोक्ता के योगदान पर ही टैक्स छूट मिलती है।
किसे स्कीम को चुनना बेहतर?
अगर आपका लक्ष्य सबसे ज्यादा टैक्स बचाना है, तो पुराने टैक्स रिजीम में NPS बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आप पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो PPF मजबूत विकल्प है। वहीं, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF रिटायरमेंट बचत का अहम हिस्सा बना रहता है।
हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इन तीनों का संतुलित इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
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