NSC Vs SCSS: सीनियर सिटिजन स्कीम का रेट NSC से ज्यादा, लेकिन ब्याज से कमाई कम! आखिर क्या है वजह?
NSC Vs SCSS: आपके पास निवेश करने के कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। जहां आपको बेहतर ब्याज के साथ ही कंपाउंडिंग का भी फायदा मिलता है। अक्सर ये देखने में आया है कि ज्यादातर लोग केवल बैंक एफडी को ही बेहतर निवेश का ऑप्शन समझते हैं। मालूम हो कि केंद्र सरकार की ओर से कई तरह के स्मॉल सेविंग स्कीम्स भी चलाई जा रही हैं। जहां लोग अपने पैसों को सुरक्षित निवेश कर सकते हैं।
यहां पर आपको ब्याज के साथ कंपाउंडिंग भी बेहतर मिलता है। इसमें PPF, SSY, NSC, SCSS, RD, FD, KVP जैसी कई स्कीम शामिल हैं। हालांकि ये सभी स्कीम सुरक्षित होती हैं, बावजूद इसके सीनियर सिटिजन स्कीम का रेट NSC से ज्यादा है, लेकिन ब्याज से कमाई कम! आइए जानते हैं, आखिर क्या है वजह?
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NSC Vs SCSS: क्या है सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS)
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सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS) में सीनियर सिटीजन अपने पैसों को 5 साल की अवधि के लिए निवेश कर सकते हैं। इस स्कीम में 8.2 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है। स्कीम में आप केवल 1000 रुपये से अपना निवेश शुरू कर सकते हैं। जबकि अधिकतम निवेश की लिमिट 30 लाख रुपये है।
NSC Vs SCSS: क्या है नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC)
पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट यानी NSC स्कीम में कोई भी व्यक्ति अपने पैसों को 5 साल की अवधि के लिए निवेश कर सकता है। NSC स्कीम में 7.7 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है। नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में भी आप 1000 रुपये से अपना निवेश शुरू कर सकते हैं। अधिकतम निवेश की कोई लिमिट नहीं है।
NSC Vs SCSS: क्यों सीनियर सिटिजन स्कीम का रेट NSC से ज्यादा है, लेकिन ब्याज से कमाई कम!
कंपाउंडिंग का अंतर- इसकी सबसे बड़ी वजह है कंपाउंडिंग का अंतर (Compounding Effect) क्योंकि NSC में आपको मिलने वाला ब्याज सालाना आधार पर मूलधन में जुड़ता जाता है। जिससे लंबी अवधि में ज्यादा फायदा मिलता है। दूसरी तरफ SCSS में ब्याज तिमाही (Quarterly) आधार पर सीधे आपके खाते में जमा हो जाता है। यानी इसमें ब्याज पर ब्याज (कंपाउंडिंग का फायदा) नहीं मिल पाता।
ब्याज की निकासी (Payouts): SCSS एक पेंशन की तरह काम करती है। जिसमें हर तीन महीने में ब्याज का पैसा निकाल लिया जाता है। यदि आप उस पैसे को कहीं और निवेश नहीं करते, तो आपकी कुल बचत पर मिलने वाला लाभ NSC से कम हो जाता है।
टैक्स की स्थिति (Taxation): दोनों ही योजनाओं में 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है। दोनों में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल (Taxable) है। सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में ब्याज का पैसा हर तिमाही आता है। जिससे आपकी सालाना आय में जुड़कर टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। विशेषकर अगर आप टैक्स स्लैब में आते हों।
सरकार ने जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए ब्याज दरें बरकरार
पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (5 वर्ष) 7.5%
पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) – 7.4%
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) – 7.7%
सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) – 8.2% ब्याज
मिल रहा है।

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