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SEBI New Rule for AMC: 1 सितंबर से म्यूचुअल फंडों के लिए इंट्राडे उधारी के नियमों में बड़ा बदलाव, सेबी ने बढ़ाया दायरा
SEBI New Rule for AMC: 1 सितंबर से म्यूचुअल फंडों के लिए इंट्राडे उधारी के नियमों में बड़ा बदलाव, सेबी ने बढ़ाया दायरा

SEBI New Rule for AMC: 1 सितंबर से म्यूचुअल फंडों के लिए इंट्राडे उधारी के नियमों में बड़ा बदलाव, सेबी ने बढ़ाया दायरा

SEBI New Rule for AMC: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंडों के लिए इंट्राडे (एक ही दिन की) उधारी सुविधा का दायरा बढ़ा दिया है। अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMC) सेटलमेंट के समय में अंतर (Settlement Timing Mismatch) से पैदा होने वाली नकदी की अस्थायी कमी को पूरा करने के लिए कई अतिरिक्त उद्देश्यों हेतु भी इंट्राडे उधार ले सकेंगी (SEBI MF Rules)।

यह नया सिस्टम 1 सितंबर 2026 से लागू होगा। यह फैसला 3 जुलाई को नोटिफाई किए गए ‘सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियम, 2026’ (Sebi (Mutual Funds) Regulations, 2026) में संशोधन के बाद लिया गया है।

पहले क्या था नियम?

अब तक म्यूचुअल फंड सिर्फ निवेशकों के रिडेम्प्शन (यूनिट बेचने पर भुगतान) और अन्य यूनिटधारकों के भुगतान जैसी अस्थायी नकदी जरूरतों के लिए, नियामकीय सीमा के भीतर, उधार ले सकते थे। अब यह सीमा बढ़ा दी गई है।

अब किन उद्देश्यों के लिए मिलेगी इजाजत?

संशोधित नियमों के तहत अब इंट्राडे उधारी का उपयोग इन कामों के लिए भी किया जा सकेगा:

  • स्कीम द्वारा किए गए निवेश के पे-इन (भुगतान) के लिए।
  • मार्क-टू-मार्केट (MTM) दायित्वों और फॉरेक्स सेटलमेंट के लिए।
  • पहले से लिए गए उधार के रि-पेमेंट के लिए।
  • निवेशकों और यूनिटधारकों को देय भुगतान के लिए।

किन आधारों पर मिलेगा इंट्राडे लोन?

सेबी के अनुसार, इंट्राडे उधारी उतनी रकम के आधार पर ली जा सकेगी, जितनी रकम उसी दिन मिलने की उम्मीद हो। इनमें ये राशियां शामिल हैं:

  • RBI, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और स्कीम के बैंक खाते में मिली सब्सक्रिप्शन राशि, जैसी गारंटीड रिसीविंग।
  • उसी दिन मिलने वाली नॉन-गारंटीड रिसीविंग, जैसे:

    1. नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD)
    2. कमर्शियल पेपर (CP)
    3. सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD)
    4. ओवर-द-काउंटर (OTC) स्वैप
    5. मैच्योरिटी की राशि और सेकेंडरी मार्केट सेटलमेंट

हालांकि, इसके यह यह भी जरूरी है कि यह सारी रकम उस म्युचुअल फंड स्कीम को कारोबारी दिन समाप्त होने से पहले मिलने वाली हो।

AMC की क्या होगी जिम्मेदारी?

  • सभी इंट्राडे उधार उसी कारोबारी दिन के अंत तक चुकाने होंगे।
  • अगर कोई उधार रातभर (Overnight) जारी रहता है, तो वह सेबी द्वारा तय उधारी सीमा के भीतर होना चाहिए और सिर्फ नियमानुसार अनुमत उद्देश्यों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • हर AMC और उसके ट्रस्टी बोर्ड को इंट्राडे उधारी के उपयोग संबंधी नीति मंजूर करनी होगी और उसे अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा।
  • AMCs को हर स्कीम के लिए यह रिकॉर्ड रखना होगा कि नकदी की कमी क्यों हुई और उधार चुकाने का स्रोत क्या होगा।

खर्च कौन उठाएगा?

सेबी ने स्पष्ट किया है कि इंट्राडे उधारी की लागत या अपेक्षित राशि समय पर न मिलने से होने वाला अतिरिक्त खर्च या नुकसान AMC वहन करेगी, न कि म्यूचुअल फंड स्कीम या उसके निवेशक। यह प्रस्ताव जून 2026 में सेबी के बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया था और अब इसे 1 सितंबर से लागू किया जाएगा।

इनपुट- पीटीआई

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