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घर खरीदने जा रहे हैं? Carpet Area, Built-up Area और Super Built-up Area का फर्क समझ लीजिए, नहीं तो हो सकता है नुकसान
घर खरीदने जा रहे हैं? Carpet Area, Built-up Area और Super Built-up Area का फर्क समझ लीजिए, नहीं तो हो सकता है नुकसान

घर खरीदने जा रहे हैं? Carpet Area, Built-up Area और Super Built-up Area का फर्क समझ लीजिए, नहीं तो हो सकता है नुकसान

अगर आप नया फ्लैट या घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ बड़े-बड़े विज्ञापनों और आकर्षक ऑफर्स को देखकर फैसला न करें। घर खरीदते समय कार्पेट एरिया, बिल्ट-अप एरिया और सुपर बिल्ट-अप एरिया का अंतर समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि कई बार जिस घर को आप 1200 वर्ग फुट (Sq. ft.) का समझकर खरीदते हैं, उसमें रहने लायक जगह काफी कम निकलती है।

क्या होता है कार्पेट एरिया?

कार्पेट एरिया का मतलब है घर के अंदर की वह वास्तविक जगह, जिसका इस्तेमाल आप रोजमर्रा की जिंदगी में कर सकते हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो यह आपके फ्लैट का रहने लायक हिस्सा होता है। इसमें बेडरूम, हॉल, किचन और बाथरूम जैसी जगहें शामिल होती हैं।

हालांकि इसमें बाहरी दीवारें, बालकनी, बरामदा, खुली छत और सर्विस शाफ्ट जैसी जगहें शामिल नहीं होतीं।

बिल्ट-अप एरिया क्या है?

बिल्ट-अप एरिया कार्पेट एरिया से थोड़ा बड़ा होता है।

इसमें कार्पेट एरिया के साथ-साथ फ्लैट की दीवारों की मोटाई और कई मामलों में बालकनी या यूटिलिटी एरिया भी जोड़ दिया जाता है।

यानी बिल्ट-अप एरिया का आंकड़ा कार्पेट एरिया से हमेशा ज्यादा होता है।

सुपर बिल्ट-अप एरिया क्या होता है?

यही वह आंकड़ा है, जिसे बिल्डर अक्सर सबसे ज्यादा प्रचारित करते हैं।

सुपर बिल्ट-अप एरिया में बिल्ट-अप एरिया के अलावा लिफ्ट लॉबी, सीढ़ियां, कॉरिडोर, क्लब हाउस, जिम, स्विमिंग पूल और अन्य साझा सुविधाओं का हिस्सा भी जोड़ दिया जाता है।

यानी यह पूरा एरिया सिर्फ आपका नहीं होता, बल्कि इसमें सोसाइटी की साझा सुविधाओं का हिस्सा भी शामिल होता है।

1200 वर्ग फुट का फ्लैट, लेकिन रहने की जगह कितनी?

विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर सुपर बिल्ट-अप एरिया का सिर्फ 65% से 80% हिस्सा ही असल में कार्पेट एरिया होता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी फ्लैट का सुपर बिल्ट-अप एरिया 1200 वर्ग फुट बताया गया है, तो उसमें वास्तविक रहने लायक जगह सिर्फ 780 से 960 वर्ग फुट के बीच हो सकती है।

यानी बाकी 20% से 35% हिस्सा कॉमन एरिया और सुविधाओं में चला जाता है।

घर खरीदते समय किस एरिया को देखें?

हाल ही में उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UPRERA) ने भी घर खरीदारों को सलाह दी है कि वे फ्लैट खरीदते समय कार्पेट एरिया को आधार बनाएं।

कारण साफ है- कार्पेट एरिया ही बताता है कि आपको वास्तव में रहने के लिए कितनी जगह मिलने वाली है।

RERA के नियम क्या कहते हैं?

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी RERA के तहत बिल्डरों को प्रोजेक्ट में बिकने वाले फ्लैटों का कार्पेट एरिया बताना अनिवार्य है।

कानून के मुताबिक, कार्पेट एरिया ही वह मानक है जिसके आधार पर खरीदार किसी प्रॉपर्टी की सही कीमत और वास्तविक आकार का आकलन कर सकते हैं।

घर खरीदने वालों के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि घर खरीदते समय सिर्फ बड़े एरिया के आंकड़े देखकर प्रभावित न हों।

सेल्स टीम अक्सर सुपर बिल्ट-अप एरिया बताती है, जो सुनने में बड़ा लगता है, लेकिन असली सवाल यह है कि आपको रहने के लिए कितनी जगह मिल रही है।

इसलिए किसी भी फ्लैट की तुलना करते समय हमेशा कार्पेट एरिया देखें। यही आपके घर की वास्तविक जगह, सही कीमत और भविष्य की वैल्यू तय करता है।

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