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‘हम इसे गैर-कानूनी नहीं कह सकते’, TMC को बड़ा झटका, SC ने मतगणना कर्मचारियों पर EC के रुख का किया समर्थन

‘हम इसे गैर-कानूनी नहीं कह सकते’, TMC को बड़ा झटका, SC ने मतगणना कर्मचारियों पर EC के रुख का किया समर्थन

Last Updated on May 2, 2026 12:54, PM by Pawan

ममता बनर्जी की पार्टी TMC को एक बड़ा झटके लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को साफ कर दिया कि चुनाव आयोग (EC) को वोटों की गिनती वाले केंद्रों पर अधिकारियों को चुनने का पूरा अधिकार है। सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि अगर काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग एजेंट दोनों ही केंद्र सरकार के अधिकारी हों, तो सिर्फ इसी वजह से नियमों को गलत नहीं कहा जा सकता।

कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने साफ किया कि काउंटिंग के लिए केंद्र या राज्य-दोनों में से किसी भी सरकार के अधिकारी चुने जा सकते हैं।

जस्टिस बागची ने कहा कि जब यह विकल्प खुला है, तो इसे नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनाव आयोग चाहे तो दोनों अधिकारी एक ही श्रेणी (जैसे केंद्र सरकार) से भी चुन सकता है, इसमें कोई गलत बात नहीं है।

TMC ने बदला रुख

इन टिप्पणियों के बाद तृणमूल कांग्रेस ने अपना रुख बदल दिया और अब चुनाव आयोग के नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की। वहीं चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सभी गाइडलाइन्स का ठीक से पालन हो रहा है।

काउंटिंग में संतुलन का दावा

चुनाव आयोग की तरफ से पेश वकील डीएस नायडू ने कहा कि व्यवस्था इस तरह बनाई गई है कि अगर काउंटिंग सुपरवाइजर केंद्र सरकार का होगा, तो काउंटिंग एजेंट राज्य सरकार का होगा।

TMC की आपत्तियां क्या थीं

TMC ने पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 4 मई को होने वाली मतगणना के लिए केंद्र सरकार और PSU के कर्मचारियों की तैनाती को सही ठहराया गया था।

TMC की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में चार बड़ी आपत्तियां रखीं:

  1. 13 अप्रैल को जारी आदेश की जानकारी पार्टी को 29 अप्रैल को मिली, जिससे समय पर प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो गया।
  2. उन्होंने पूछा कि हर बूथ पर गड़बड़ी की आशंका क्यों जताई जा रही है-इसका आधार क्या है?
  3. पहले से ही हर टेबल पर माइक्रो-ऑब्जर्वर के रूप में केंद्रीय अधिकारी मौजूद हैं, तो फिर और केंद्रीय अधिकारी की जरूरत क्यों?
  4. चुनाव आयोग के नियम में राज्य सरकार के अधिकारियों को शामिल करने की बात है, लेकिन ऐसा किया नहीं जा रहा।

कुल मिलाकर, कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराया और साफ कर दिया कि अधिकारियों की तैनाती का अंतिम अधिकार उसी के पास है।