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Jyeshtha Adhik Maas 2026: 17 मई से शुरू हो रहे ज्येष्ठ अधिक मास में रुक जाएंगे मांगलिक कार्य, जानें इस माह में क्या करें और क्या न करें

Jyeshtha Adhik Maas 2026: 17 मई से शुरू हो रहे ज्येष्ठ अधिक मास में रुक जाएंगे मांगलिक कार्य, जानें इस माह में क्या करें और क्या न करें

Last Updated on May 4, 2026 17:17, PM by Pawan

Jyeshtha Adhik Maas 2026: इस बार हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ बहुत खास है। इस माह में अधिक मास लग रहा है, जिससे यह 28 या 30 दिनों का न होकर तकरीबन 60 दिनों का होगा। अधिकमाह को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होगी और यह 15 जून तक चलेगा। एक माह की अवधि में पूजा-पाठ, दान और साधान का अहम स्थान होता है। हालांकि, इस अवधि में मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक रहती है। आइए जानें इस माह में क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए ?

क्या है अधिक मास और ये क्यों पड़ता है?

हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि साल की गणना सूर्य से होती है। इसी कारण दोनों में थोड़ा अंतर आ जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर 2-3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहते हैं। जब किसी महीने में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, तब वह महीना अधिकमास बन जाता है।

अधिक मास में नहीं होंगे मांगलिक कार्य

हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ 2 मई 2026 से शुरू हो चुका है। इसकी अमावस्या 16 मई को होगी। द्रिक पंचांग के अनुसार, 17 मई से 15 जून तक चलने वाला यह अतिरिक्त महीना ज्येष्ठ को लंबा बना देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय शादी-विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन पूजा-पाठ, जप और दान के लिए यह समय बेहद शुभ माना जाता है।

अधिक मास के नियम

स्नान और शुद्धि का महत्व : अधिक मास में पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। अगर बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगा जल मिला कर स्नान कर सकते हैं। इसे भी लाभकारी माना गया है।

विष्णु सहस्रनाम का जाप : अधिकमास को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। इस दौरान रोज उनका नाम स्मरण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और पूजा करने से विशेष फल मिलता है। श्री हरि को तुलसी दल, माखन-मिश्री और फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

बाल गोपाल और हनुमान जी की आराधना : घर में बाल गोपाल की पूजा करें और उन्हें माखन-मिश्री अर्पित करें। साथ ही हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा और सुंरकांड का पाठ करने से साहस और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

भगवान शिव की पूजा से मिलता है विशेष फल : अधिकमास में भगवान शिव की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, चंदन और बिल्व पत्र चढ़ाएं और ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें।

धार्मिक ग्रंथों का पाठ : अधिक मास में श्री मद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण और रामायण का पाठ या श्रवण करना बहुत पुण्यदायी होता है। इससे मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।

दान-पुण्य और सेवा करें : इस पूरे महीने में जरूरतमंदों को भोजन कराना, कपड़े, अनाज या धन का दान करना बेहद शुभ माना गया है। गोशाला में गायों को चारा खिलाना भी पुण्यदायी होता है।