FMCG Price Hike: साबुन से लेकर बिस्किट तक, क्या दिग्गज कंपनियां बढ़ाएंगी दाम? HUL, ब्रिटानिया ने दिए संकेत
FMCG Price Hike: रसोई के बजट से लेकर बाथरूम की जरूरतों के सामान तक, आम आदमी की जेब पर महंगाई का एक और बड़ा प्रहार होने की संभावना है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पैकेजिंग सामग्री की लागत में उछाल और फ्यूल के महंगे होने की वजह से देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अपने गिरते मुनाफे को बचाने के लिए फेज वाइज तरीके से कीमतों में वृद्धि कर सकती हैं, जिसका सीधा असर आपके घर के रोजमर्रा के सामान जैसे- साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर पड़ेगा।
क्यों बढ़ रही है लागत?
कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे न सिर्फ कच्चे माल की उपलब्धता कम हुई है, बल्कि लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की लागत भी बढ़ गई है।
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इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी ने आयातित कच्चे माल को और महंगा बना दिया है। पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले लैमिनेट, एलपीजी और पीएनजी की बढ़ती कीमतें ऑपरेटिंग कॉस्ट में बड़ा इजाफा कर रही हैं।
HUL और ब्रिटानिया के संकेतों ने बढ़ाई चिंता
देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर कॉमोडिटीज की कीमतों में दबाव बना रहा, तो वे कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकते हैं। कंपनी के मुताबिक, उन पर अब तक 8-10 फीसदी महंगाई का बोझ पड़ा है, जिसके बदले उन्होंने चुनिंदा पोर्टफोलियो में 2-5 फीसदी बढ़ा दी है।
दूसरी ओर, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने ईंधन और पैकेजिंग लागत में 20 फीसदी की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी के सीईओ रक्षित हरगेव के अनुसार, बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी तय है। ब्रिटानिया अपने लोकप्रिय ब्रांड्स जैसे गुड डे, मेरी गोल्ड और टाइगर बिस्किट के लिए सीधे दाम बढ़ाने या पैकेट के वजन में कटौती करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।
डाबर का 10 फीसदी महंगाई से सामना
डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी इस वित्त वर्ष में करीब 10 फीसदी महंगाई का सामना कर रही है। इस प्रभाव को संतुलित करने के लिए कंपनी पहले ही विभिन्न सेगमेंट में एवरेज 4 फीसदी तक दाम बढ़ा चुकी है। कंपनी अब कॉस्ट कंट्रोल के दूसरे उपायों पर भी जोर दे रही है, ताकि उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम किया जा सके।
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प्रोडक्ट्स की वजन घटाने की स्ट्रैटजी
कंपनियां ग्रामीण और निम्न आय वाले बाजारों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए एक खास स्ट्रैटजी अपना रही हैं। वे 5, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैकेटों की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इसकी भरपाई के लिए पैकेट के अंदर सामान के वजन को कम किया जा रहा है। इसे श्रिंकफ्लेशन कहा जाता है, जहां उपभोक्ता को कीमत वही देनी पड़ती है, लेकिन उसे मिलने वाली सामग्री पहले के मुकाबले कम हो जाती है।
एफएमसीजी कंपनियों के आगे की रणनीति
बढ़ती लागत को मैनेज करने के लिए कंपनियां केवल दाम ही नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि अपने आंतरिक खर्चों में भी कटौती कर रही हैं। कंपनियां अब उपभोक्ताओं को मिलने वाली भारी छूट और बड़े विज्ञापनों पर होने वाले खर्चों को कम कर रही हैं। आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल बनाकर और इन्वेंट्री मैनेजमेंट को मजबूत करके लागत घटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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