Tamil Nadu Election: तिराहे पर विजय, लेकिन इन तीन रास्तों से बना सकते हैं सरकार
Last Updated on May 4, 2026 14:34, PM by Pawan
Tamil Nadu Election: तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के नतीजों में विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। इसके बावजूद पार्टी स्पष्ट बहुमत से दूर रह सकती है। 234 विधानसभा सीटों वाले तमिलनाडु में टीवीके 110-112 सीटों पर आगे चल रही है। एआईएडीएमके गठबंधन 68 सीटों पर आगे है, जबकि डीएमके करीब 55 सीटों पर आगे चल रही है।
तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए कम से कम 118 सीटें चाहिए। ऐसा लगता है कि विजय की टीवीके इस संख्या से थोड़ी दूर रह सकती है। ऐसा होने पर विजय के लिए सरकार बनाना मुश्किल हो जाएगा। सीएनएन-न्यूज18 के मुताबिक, विजय के लिए आगे तीन तरह की स्थितियां उभर रही हैं।
1. छोटे दलों का सहयोग
पहले विकल्प के तहत विजय छोटे दलों से संपर्क कर सकते हैं। इनमें कांग्रेस, पीएमके, सीपीआई और वीसीके शामिल हैं। इससे विजय के हाथ में पूरी तरह से सरकार की चाबी बनी रहेगी। साथ ही वह खुद को राज्य में डीएमके और एआईडीएमके के विकल्प के रूप में पेश कर सकेंगे। हाालांकि, इस विकल्प में उन्हें छोटे दलों की बड़ी मांगों से निपटना पड़ सकता है।
2. एआईएडीएमके से समझौता
टीवीके राज्य के बड़े गठबंधन एआईएडीएमके से समझौता कर सकती है। यह पार्टी राज्य में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभर रही है। एआईएडीएमके के कई नेताओं के पास सरकार चलाने का अनुभव है। इसका फायदा विजय को हो सकता है। लेकिन, एआईएडीएमके से हाथ मिलाने से विजय की छवि पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा बीजेपी एआईएडीएमके गठबंधन का हिस्सा है। टीवीके के कार्यकर्ता बीजेपी से हाथ मिलाने को तैयार नहीं होंगे।
3. डीएमके का सहयोग
तीसरे विकल्प में विजय डीएमके से हाथ मिला सकते हैं। लेकिन, इसकी संभावना बहुत कम है। लेकिन, राजनीति में कुछ भी पक्का नहीं होता है। डीएमके में कांग्रेस शामिल है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि विजय ने अपनी रैलियों में डीएमके और एआईएडीएमके पर निशाना साधा था। डीएमके के साथ जाने से टीवीके कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ सकता है।
एक्सर्ट्स का कहना है कि विजय के लिए सरकार बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लेकिन, यह तय है कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए सितारे का उदय हुआ है। टीवीके सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई है। यह इस बात का संकेत है कि अब तमिलनाडु की राजनीति डीएमके और एआईएडीएमके की छाया से बाहर आ रही है।
