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ET Now Markets Summit 2026: लंबे वॉर के बावजूद कॉर्पोरेट नतीजों ने दिया पॉजिटिव सरप्राइज-सुनील सिंघानिया
ET Now Markets Summit 2026: लंबे वॉर के बावजूद कॉर्पोरेट नतीजों ने दिया पॉजिटिव सरप्राइज-सुनील सिंघानिया

ET Now Markets Summit 2026: लंबे वॉर के बावजूद कॉर्पोरेट नतीजों ने दिया पॉजिटिव सरप्राइज-सुनील सिंघानिया

ET Now Markets Summit 2026 में Abakkus Asset Manager के फाउंडर सुनील सिंघानिया ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी वॉर उम्मीद से अधिक लंबा चला है लेकिन इसके बावजूद भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे ने पॉजिटिव सरप्राइज दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है। आईटी सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि 6 महीने पहले भारतीय आईटी सेवा कंपनियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव को लेकर काफी अनिश्चितता थी क्योंकि भारतीय आईटी सर्विस कंपनियों का कारोबार काफी हद तक कर्मचारियों की संख्या पर आधारित है, इसलिए भर्ती की रफ्तार में कमी देखने को मिली है। इसी वजह से उनकी आईटी सर्विस कंपनियों को लेकर राय अभी भी बहुत पॉजिटिव नहीं है।

उन्होंने कहा कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बार-बार बदलाव नहीं करना चाहिए खासकर ऐसे लीडर्स के बयानों के आधार पर जो लगातार अप्रत्याशित रुख अपनाते रहे हों। उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट संघर्ष शुरू होने के बाद 39 बार ऐसे संकेत मिले कि युद्ध समाप्त होने वाला है लेकिन हर बार स्थिति बदल गई।

निवेशकों ने किया दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों का रुख

सिंघानिया ने कहा कि छह महीने पहले ग्लोबल निवेशकों का हॉट मनी सोने और चांदी की ओर जा रहा था, जबकि अब यह दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार में निवेश का मूल आधार हमेशा कंपनियों की बुनियादी मजबूती (बॉटम-अप अप्रोच) रहा है और फंड मैनेजरों को कई अवसरों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

बड़ी कंपनियों में भी अच्छे निवेश अवसर

उन्होंने यह भी कहा कि स्टॉक चयन केवल स्मॉलकैप कंपनियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। बड़ी कंपनियों में भी अच्छे निवेश अवसर मिल सकते हैं और निवेशकों को सभी मार्केट कैपिटलाइजेशन में स्टॉक-स्पेसिफिक स्ट्रैटेजी अपनानी चाहिए। वर्तमान समय में बहस इस बात पर है कि कौन-सी कंपनियां अपने वैल्यूएशन के मुकाबले बेहतर हैं और कौन-सी महंगी हैं। उन्होंने कहा कि हालिया करेक्शन के बाद बाजार पहले की तुलना में अधिक संतुलित और समझदारीपूर्ण नजर आ रहा है।

सिंघानिया ने कहा कि कुछ समय पहले बाजार में यह धारणा थी कि सोलर सेक्टर में क्षमता बढ़ने से चांदी की मांग तेज होगी और कीमतों में बड़ी तेजी आएगी। लेकिन अब तक बड़े पैमाने पर क्षमता बढ़ोतरी के बावजूद चांदी की कीमतों में कोई खास उछाल नहीं देखा गया है। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में मल्टी-एसेट फंड्स में अच्छा निवेश आया, क्योंकि इन फंड्स में सोना और चांदी का आवंटन था और इन ऐसेट ने बेहतर रिटर्न दिए। गोल्ड और सिल्वर में बढ़ी रुचि ने मल्टी-एसेट फंड्स में निवेश प्रवाह को मजबूत किया।

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