Online Shopping: 1,241 रुपये का सूटकेस मिला डैमेज, शिकायत पर रिफंड के साथ 15,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश
Online Shopping: फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग करते समय अगर आपके घर भी ऑर्डर किया गया सामान खराब या टूटी हालत में पहुंच जाए, तो इसे लेकर परेशान होने या बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद इंतजार करते रहने की जरूरत नहीं है। हिमाचल प्रदेश के शिमला में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक ग्राहक को ₹1,241 का केबिन सूटकेस डैमेज हालत में मिला। ग्राहक ने विक्रेता से इसे बदलने की मांग की, लेकिन पांच महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, शिमला ने विपक्षी पक्ष को सूटकेस की पूरी कीमत ब्याज सहित लौटाने, मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹10,000 और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹5,000 देने का आदेश दिया। इस तरह ग्राहक को कुल ₹15,000 का मुआवजा और सूटकेस की कीमत ब्याज सहित वापस पाने का आदेश मिला।
क्या है पूरा मामला?
मामला शिमला के एक उपभोक्ता से जुड़ा है, जिसने 16 दिसंबर को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ₹1,241 का केबिन सूटकेस ऑर्डर किया था। सामान 23 दिसंबर को ग्राहक के घर पहुंचा, लेकिन सूटकेस डैमेज हालत में था। यानी ग्राहक को ऑर्डर किया गया सामान मिलने के बाद ही उसकी खराब स्थिति का पता चला।
एक्सचेंज की मंजूरी मिली, लेकिन पांच महीने तक नहीं बदला सूटकेस
सूटकेस डैमेज मिलने के बाद ग्राहक ने विक्रेता को इसकी जानकारी दी और सामान बदलने यानी एक्सचेंज का अनुरोध किया। ग्राहक के मुताबिक, विक्रेता ने इस अनुरोध को मंजूरी भी दे दी थी। इसके बावजूद सूटकेस बदलने या समस्या का समाधान करने के लिए पांच महीने से ज्यादा समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
लगातार इंतजार और आश्वासन के बाद ग्राहक ने न्याय पाने के लिए उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
21 मई 2026 को दर्ज कराई शिकायत
ग्राहक ने 21 मई 2026 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, शिमला में शिकायत दर्ज कराई। आयोग के सामने मामले की सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष उपस्थित नहीं हुआ और उसने अपना जवाब भी पेश नहीं किया।
इसके बाद आयोग ने 28 सितंबर 2026 को मामले में आदेश जारी किया। आयोग ने इस मामले को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए विपक्षी पक्ष को ग्राहक को राहत देने के निर्देश दिए।
आयोग ने क्या-क्या आदेश दिए?
आयोग ने विपक्षी पक्ष को चार अहम निर्देश दिए हैं:
₹1,241 की पूरी रकम लौटाएं: सूटकेस की कीमत शिकायत दर्ज होने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ वापस करनी होगी।
₹10,000 का मुआवजा दें: ग्राहक को हुए मानसिक उत्पीड़न के लिए यह राशि देने का आदेश दिया गया है।
₹5,000 मुकदमे का खर्च दें: शिकायत और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए ग्राहक को यह रकम दी जाएगी।
45 दिनों में आदेश का पालन करें: विपक्षी पक्ष को तय समयसीमा के भीतर आयोग के आदेश का पालन करना होगा।
इस तरह ग्राहक को सूटकेस की कीमत ब्याज सहित वापस मिलने के साथ मानसिक उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च के लिए कुल ₹15,000 देने का आदेश दिया गया है।

Leave a Reply