RIL Share Target: रिलायंस इंडस्ट्रीज में 33% तेजी का अनुमान, मिडिल ईस्ट टेंशन कैसे बना मुकेश अंबानी के लिए कमाई का मौका
RIL Share Target: मिडिल ईस्ट में जारी टेंशन और रूस की रिफाइनरियों पर बढ़ते हमलों ने ग्लोबल ऑयल मार्केट का समीकरण बिगाड़ दिया है। दुनिया के कुछ बड़े रिफाइनिंग सेंटरों में उत्पादन प्रभावित होने से पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और रिफाइनिंग मार्जिन काफी मजबूत हो गए हैं। ऐसे माहौल में Reliance Industries को फायदा मिल सकता है। ग्लोबल ब्रोकरेज Jefferies ने Reliance पर Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹1,710 कर दिया है। 31 अगस्त के ₹1,284.40 के बंद भाव के मुकाबले यह करीब 33% की तेजी की गुंजाइश दिखाता है।
दुनिया में रिफाइनिंग क्षमता घटी, Reliance के लिए बना मौका
Jefferies के मुताबिक, संघर्षों की वजह से दुनिया की करीब 4% रिफाइनिंग क्षमता फिलहाल प्रभावित हुई है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद रिफाइनरी रन करीब 2.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन घटे हैं। इसमें करीब 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी Strait of Hormuz के बंद होने और करीब 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी रिफाइनरियों को हुए नुकसान से जुड़ी है। रूस में भी पिछले एक साल में करीब 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है।
इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पर पड़ा है। यूरोप में डीजल और अमेरिका में गैसोलीन का स्टॉक पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। यानी मांग के मुकाबले सप्लाई का समीकरण तंग है। यही स्थिति रिफाइनिंग मार्जिन को ऊपर बनाए रखने में मदद कर रही है। Jefferies के मुताबिक डीजल क्रैक करीब 70 डॉलर प्रति बैरल और गैसोलीन क्रैक करीब 47.3 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि 2QFY27 में अब तक Singapore GRM का औसत 21.2 डॉलर प्रति बैरल रहा है।
FY27 में O2C कारोबार को मिलेगा बड़ा सहारा
यही पूरी कहानी Reliance के Oil-to-Chemicals यानी O2C कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है। कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और दूसरे उत्पादों में बदलने पर मिलने वाला मार्जिन मजबूत रहने से रिफाइनिंग कारोबार की कमाई को सहारा मिलता है। Jefferies का मानना है कि यह सप्लाई की तंगी 2026 के दौरान बनी रह सकती है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में क्षतिग्रस्त कुछ रिफाइनरियों को ठीक होने में 4-6 महीने लग सकते हैं। रूस में भी रिफाइनरी बंद रहने की अवधि नुकसान और मरम्मत की स्थिति पर निर्भर करेगी।
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Reliance के लिए खास फायदा यह है कि उसकी रिफाइनिंग क्षमता का बड़ा हिस्सा SEZ रिफाइनरी में है और Jefferies के मुताबिक यह मौजूदा विंडफॉल टैक्स से बाहर है। इसलिए ऊंचे रिफाइनिंग मार्जिन का फायदा कंपनी की कमाई में बेहतर तरीके से दिखाई दे सकता है।
पेट्रोकेमिकल मार्जिन भी दे रहे हैं साथ
Reliance को सिर्फ रिफाइनिंग से ही फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है। पेट्रोकेमिकल कारोबार के मार्जिन भी मजबूत बने हुए हैं। Jefferies के मुताबिक PE, PP और PET के औसत पेट्रोकेमिकल मार्जिन फरवरी के अंत की तुलना में 2QFY27 में 64% बढ़े हैं। इससे O2C कारोबार की लाभप्रदता को एक और सहारा मिल रहा है। हालांकि LPG उत्पादन ज्यादा रहने से Reliance के PP वॉल्यूम पर दबाव बना हुआ है।
Retail की रिकवरी बनी दूसरा बड़ा ट्रिगर
Jefferies की तेजी की कहानी सिर्फ O2C पर निर्भर नहीं है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि Reliance Retail की ग्रोथ फिर से मध्य-किशोर यानी मिड-टींस स्तर पर लौट सकती है। अगर ऐसा होता है तो शेयर की वैल्यूएशन में दोबारा तेजी यानी रीरेटिंग देखने को मिल सकती है। Jefferies FY26-29 के दौरान Reliance के कंसोलिडेटेड EBITDA में करीब 10% सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि का अनुमान लगा रहा है। इसी अवधि में Retail EBITDA CAGR करीब 13% और O2C EBITDA CAGR करीब 9% रहने का अनुमान है।
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₹1,710 के बाद ₹1,900 भी संभव, लेकिन जोखिम भी हैं
Jefferies ने बेस केस में ₹1,710 का टारगेट रखा है। अगर रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल मार्जिन अनुमान से ज्यादा मजबूत रहते हैं और रिटेल उम्मीद से तेज बाजार हिस्सेदारी बढ़ाता है, तो उसका अपसाइड केस ₹1,900 है। वहीं कमजोर रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल मार्जिन, चीन की धीमी रिकवरी और न्यू एनर्जी कारोबार को कोई वैल्यू न मिलने की स्थिति में डाउनसाइड केस ₹1,250 है।
(Disclaimer: शेयर पर निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई है। यह ET NOW Swadesh के निजी विचार नहीं हैं। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।)

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