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SBI AMC IPO : बिगेस्ट म्यूचुअल फंड का बिगेस्ट आईपीओ क्यों बन सकता है मुनाफे की डील? 38x P/E के बावजूद ब्रोकरेज बुलिश
SBI AMC IPO : बिगेस्ट म्यूचुअल फंड का बिगेस्ट आईपीओ क्यों बन सकता है मुनाफे की डील? 38x P/E के बावजूद ब्रोकरेज बुलिश

SBI AMC IPO : बिगेस्ट म्यूचुअल फंड का बिगेस्ट आईपीओ क्यों बन सकता है मुनाफे की डील? 38x P/E के बावजूद ब्रोकरेज बुलिश

SBI Fund Management IPO: एसबीआई म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund) का आईपीओ आज 14 जुलाई को पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है और इसे 16 जुलाई तक सब्सक्राइब किया जा सकता है। आईपीओ के पहले इसे लेकर ग्रे मार्केट में क्रेज है और जीएमपी 100 रुपये के पार चला गया है। आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 545 से 574 रुपये प्रति शेयर तय है और इश्यू साइज 11,693 करोड़ रुपये है।

इस आईपीओ में फ्रेश इश्यू नहीं है और यह पूरी तरह से ओएफएस है। ओएफएस के तहत 20,37,09,239 शेयर बेचे जाएंगे। कर्मचारियों को अपर प्राइस बैंड पर प्रति शेयर 54 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा। पोस्ट इश्यू साइज कंपनी का मार्केट कैप 1,11,007 से 1,16,914 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। आईपीओ मेंं QIB के लिए 50%, रिटेल निवेशकों के लिए 35% और NII के लिए 15% शेयर रिजर्व हैं। ब्रोकरेज हाउस वैल्युएशन को लेकर कंफर्ट दिख रहे हैं और सब्सक्राइब करने की सलाह है।

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SMIFS : सब्सक्राइब

ब्रोकरेज के अनुसार अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का अनुमानित मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये से 1.20 लाख करोड़ रुपये के बीच होगा। FY26 के 30,673.76 मिलियन रुपये के PAT के आधार पर कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो लगभग 38 से 39 गुना बैठता है।

यह वैल्यूएशन पहली नजर में महंगा लग सकता है, लेकिन अगर कंपनी अपनी कमाई में लगातार अच्छी बढ़ोतरी बनाए रखती है, तो बाजार में मजबूत स्थिति, ऊंचे रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और लगातार अच्छा कैश फ्लो पैदा करने वाली एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के लिए इसे बहुत ज्यादा महंगा नहीं माना जाएगा।

ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की तुलना HDFC AMC, Nippon Life India AMC, UTI AMC और ICICI Prudential AMC जैसी लिस्टेड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के साथ होती है। हालांकि, तुलना करते समय AUM साइज, इक्विटी स्कीम का हिस्सा, मुनाफा, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, पैसिव फंड कारोबार में हिस्सेदारी और संस्थागत कारोबार जैसे अंतर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

SBI Funds Management अपने बड़े साइज और बाजार में मजबूत स्थिति की वजह से प्रीमियम वैल्यूएशन का हकदार हो सकता है। लेकिन अगर निवेशकों को लगता है कि कम फीस वाले PMS और पैसिव फंड का ज्यादा हिस्सा और रेगुलेटरी दबाव के कारण फीस में कमी आने से आने वाले सालों में कंपनी की कमाई प्रभावित हो सकती है, तो शेयर को कुछ डिस्काउंट वैल्यूएशन भी मिल सकता है।

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Anand Rathi : सब्सक्राइब

SBI Funds Management एसेट्स अंडर मैनेजमेंट के आधार पर भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का मार्केट शेयर 15.3% था। कंपनी का बिजनेस मॉडल एसेट लाइट और फीस आधारित है। यह म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज, ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF), स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) और एडवाइजरी जैसी सर्विसेज देती है। इसके प्रोडक्ट में इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, पैसिव और इंटरनेशनल फंड शामिल हैं।

ब्रोकरेज के अनुसार अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का P/E रेश्यो 38.1 गुना और EV/EBITDA 33.6 गुना है। यह FY26 की अर्निंग्स के आधार पर है। IPO के बाद कंपनी का मार्केट कैप करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये होगा। IPO की कीमत पहले से ही फुली प्राइस्ड रखी गई है। इसके बावजूद कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति और कारोबार को देखते हुए IPO को सब्सक्राइब करने की सलाह है।

Swastika Investmart : सब्सक्राइब

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के हेड आफ वेल्थ, शिवानी न्याती का कहना है कि भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) SBI फंड्स मैनेजमेंट के पास 12.5 लाख करोड़ रुपये का AUM है। कंपनी का SIP कारोबार मजबूत है और इसे SBI और Amundi के व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का लाभ मिलता है।

IPO के अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन FY26 के अनुमानित EPS के 38.12 गुना है, जो इंडस्ट्री के एवरेज 41.64 गुना से कम है। इससे इसका वैल्यूएशन उचित माना जा सकता है। कंपनी का RoNW (रिटर्न ऑन नेटवर्थ) 43.02% और EBITDA मार्जिन 81.56% है, जो इसके बेहद प्रॉफिटेबल और एसेट लाइट बिजनेस मॉडल को दर्शाता है।

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी कंपनी इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं कर रही है और इससे कंपनी को कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी।

भविष्य में कंपनी की कमाई मुख्य रूप से AUM में बढ़ोतरी और बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी का बड़ा आकार, मजबूत मुनाफा, बेहतर मार्जिन और उचित वैल्यूएशन इसे सब्सक्राइब करने लायक बनाते हैं।

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लो ऑपरेटिंग एक्सपेंस रेश्यो

ब्रोकरेज हाउस एसबीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि एसबीआई फंड मैनेजमेंट भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। इसे अपने 2 मजबूत प्रमोटर्स स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और Amundi का सपोर्ट हासिल है। कंपनी की एक्टिव म्यूचुअल फंड स्कीम्स में भी मजबूत स्थिति है।

इसके अलावा, SBI के भरोसेमंद ब्रांड और पूरे भारत में फैले बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का फायदा कंपनी को मिलता है, जिससे आगे भी इसके कारोबार में मजबूत ग्रोथ और नए निवेशकों तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

FY24 से FY26 के बीच कंपनी का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 14% सालाना के एवरेज रेट (CAGR) से बढ़ा है। इक्विटी AUM में 22% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई है।

कंपनी का ऑपरेटिंग एक्सपेंस रेश्यो इंडस्ट्री की अन्य कंपनियों की तुलना में सबसे कम है। इससे पता चलता है कि कंपनी बड़े पैमाने पर काम करने और खर्च को कुशलता से कंट्रोल करने में सक्षम है। IPO के अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन FY26 के अनुमानित P/E के 38.1 गुना है।

कंपनी की ताकत (Strengths)

  • SBI फंड्स मैनेजमेंट AUM के आधार पर भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। FY26 तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में इसकी 15.3% हिस्सेदारी है।
  • कंपनी पैसिव फंड्स के मामले में भी भारत में नंबर-1 है। इसका बाजार हिस्सा 29.6% है और पैसिव फंड्स का AUM 3,99,953 करोड़ रुपये है।
  • कंपनी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और Amundi Asset Management जैसे 2 मजबूत प्रमोटर्स का समर्थन है, जिससे इसे भारत में मजबूत पहुंच और ग्लोबल एसेट मैनेजमेंट का अनुभव मिलता है।
  • SBI की देशभर में फैली ब्रांचों, YONO प्लेटफॉर्म, बैंकों और थर्ड-पार्टी डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए कंपनी का मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है, जिससे यह ज्यादा से ज्यादा निवेशकों तक पहुंचती है।
  • कंपनी की ऑपरेशंस से होने वाली आय FY23 से FY25 के बीच 29.01% की सालाना औसत दर (CAGR) से बढ़ी है।
  • दिसंबर 2025 तक कंपनी के पास 1.6 करोड़ से अधिक रिटेल निवेशक थे, जो इसके मजबूत रिटेल कारोबार को दिखाता है।
  • कंपनी की मौजूदगी जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी है, जिससे उसे आय के कई सोर्स मिलते हैं और कारोबार में विविधता बनी रहती है।

रिस्क फैक्टर्स (Risks)

  • SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी कंपनी को इस इश्यू से कोई नया पैसा नहीं मिलेगा। IPO से मिलने वाली पूरी राशि शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी।
  • कंपनी फिलहाल SBI ब्रांड का इस्तेमाल लाइसेंस के तहत करती है। अगर भविष्य में SBI की हिस्सेदारी 26% से कम हो जाती है, तो यह अधिकार समाप्त हो सकता है। इससे कंपनी के लिए ब्रांड पर निर्भरता का जोखिम बना रहेगा।
  • SBI का लोगो अभी ट्रेड मार्क एक्ट, 1999 के तहत रजिस्टर्ड नहीं है। इससे भविष्य में ब्रांड सुरक्षा को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी रह सकती है।
  • कंपनी ने यह भी बताया है कि एक थर्ड-पार्टी वेंडर से जुड़े साइबर सिक्योरिटी हादसे में कुछ कर्मचारियों का डेटा उजागर हो गया था।
  • SBI फंड्स मैनेजमेंट के IPO में SBI के मौजूदा शेयरधारकों के लिए कोई अलग कोटा नहीं है। यानी SBI के शेयर रखने वाले निवेशकों को कोई प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट नहीं मिलेगा।
  • अगर भविष्य में म्यूचुअल फंड और एसेट मैनेजमेंट उद्योग से जुड़े नियमों में बदलाव होता है, तो इसका असर कंपनी की फीस, आय और मार्जिन पर पड़ सकता है।

(Disclaimer: आईपीओ में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दिया गया है, यह ET NOW Swadesh के निजी विचार नहीं हैं। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।)

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