Vedanta Aluminum पर ब्रोकरेज ने शुरू की कवरेज 20% अपसाइड के साथ दी BUY कॉल, लॉर्ज कैप में हुई एंट्री
Vedanta Group के डिमर्जर के बाद अलग कंपनी के तौर पर लिस्ट हुई Vedanta Aluminium Metal Ltd (VAML) अब बाजार में तेजी से अपनी पहचान बना रही है। लिस्टिंग के कुछ ही हफ्तों के भीतर कंपनी को AMFI ने जुलाई 2026 की री-क्लासिफिकेशन में Large Cap कैटेगरी में शामिल कर लिया है। इसी बीच ब्रोकरेज Motilal Oswal ने भी पहली बार इस स्टॉक पर कवरेज शुरू करते हुए BUY रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने 451 रुपये के मौजूदा भाव के मुकाबले 540 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो करीब 20% अपसाइड का संकेत देता है।
भारत की सबसे बड़ी Pure-Play एल्युमिनियम कंपनी
1 मई 2026 को वेदांता लिमिटेड के डिमर्जर के बाद Vedanta Aluminium एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में सामने आई। कंपनी अब भारत की सबसे बड़ी Pure-Play Primary Aluminium Producer है और चीन को छोड़ दें तो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों में शामिल है।
कंपनी के पास करीब 60% घरेलू बाजार हिस्सेदारी है और झारसुगुड़ा तथा बाल्को (BALCO) के जरिए कुल 2.9 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) स्मेल्टिंग क्षमता है। FY28 तक यह क्षमता बढ़कर 3 MTPA होने की उम्मीद है।
ब्रोकरेज क्यों है इतना बुलिश?
Motilal Oswal का मानना है कि Vedanta Aluminium आने वाले वर्षों में मजबूत कमाई दिखा सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक FY26 से FY28 के बीच कंपनी का EBITDA 18% से ज्यादा CAGR से बढ़ सकता है। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं। उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी, लागत में लगातार कमी और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स का बढ़ता योगदान।
ब्रोकरेज का कहना है कि वैश्विक एल्युमिनियम बाजार भी कंपनी के पक्ष में है। चीन में उत्पादन पर सीमा, यूरोप और रूस में सप्लाई बाधाएं और कई वर्षों से नए निवेश की कमी के चलते ग्लोबल सप्लाई टाइट बनी हुई है। वहीं भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की वजह से एल्युमिनियम की मांग लगातार बढ़ रही है।
इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल देगा लागत में बढ़त
Vedanta Aluminium का सबसे बड़ा मजबूत पक्ष इसका पूरी तरह इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल है। कंपनी बॉक्साइट माइनिंग से लेकर एलुमिना रिफाइनिंग, पावर और स्मेल्टिंग तक पूरी वैल्यू चेन खुद संचालित करती है।
लांजीगढ़ रिफाइनरी की क्षमता 2 MTPA से बढ़ाकर 5 MTPA की जा चुकी है। वहीं सिजीमाली बॉक्साइट खदान के शुरू होने के बाद FY28 से कच्चे माल की लागत में और कमी आने की उम्मीद है। बिजली उत्पादन लागत एल्युमिनियम उद्योग का बड़ा हिस्सा होती है और कंपनी के पास करीब 4.5 गीगावॉट कैप्टिव पावर क्षमता है। इसके अलावा 1.3 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी के लिए भी दीर्घकालिक समझौते किए गए हैं, जिससे लागत पर और नियंत्रण मिलेगा।
ये भी पढ़ें: TCS Q1 Dividend: टाटा ग्रुप की दिग्गज कंपनी ने दिया बड़ा कैश रिवॉर्ड, निवेशकों को मिलेगा 1200% डिविडेंड का तोहफा
Large Cap बनने से बढ़ सकती है संस्थागत खरीदारी
AMFI द्वारा Large Cap कैटेगरी में शामिल किए जाने के बाद अब उन घरेलू म्यूचुअल फंड्स की नजर भी इस स्टॉक पर जाएगी, जो केवल Large Cap कंपनियों में निवेश करते हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले समय में संस्थागत निवेश बढ़ सकता है और शेयर को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है।
ब्रोकरेज हाउस Emkay Global, Investec और CLSA भी पहले से इस स्टॉक पर सकारात्मक नजरिया रखते हैं। इनके टारगेट 540 रुपये से लेकर 630 रुपये तक हैं, जो मौजूदा स्तर से 18% से 40% तक संभावित बढ़त का संकेत देते हैं।
रिकॉर्ड उत्पादन और मजबूत आउटलुक
Vedanta Aluminium ने FY27 की पहली तिमाही में 6.32 लाख टन का अब तक का सबसे अधिक तिमाही एल्युमिनियम उत्पादन दर्ज किया। यह पिछले साल की तुलना में करीब 5% ज्यादा है। यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमिनियम की कीमतों पर दबाव बना हुआ था।
ये भी पढ़ें: SBI AMC IPO: सिर्फ 15 पैसे के दांव से SBI कमा लेगा 7,366.39 करोड़ रुपये, कैसे आईपीओ भर रहा सरकारी बैंक की तिजोरी
हालांकि ब्रोकरेज ने यह भी कहा है कि एल्युमिनियम कीमतों में उतार-चढ़ाव, इनपुट लागत बढ़ने, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और वैश्विक व्यापार संबंधी चुनौतियां कंपनी के लिए प्रमुख जोखिम बने रह सकते हैं। इसके बावजूद मौजूदा वैल्यूएशन पर स्टॉक को लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से आकर्षक माना गया है।
Disclaimer: शेयर को लेकर सलाह ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई हैं। यह ET NOW Swadesh के निजी विचार नहीं हैं। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

Leave a Reply