Global Fintech Fest 2026 : SEBI चीफ ने कॉरपोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन प्लेटफॉर्म किया लॉन्च, निवेशकों के लिए क्या है मायने?
Global Fintech Fest 2026 : सेबी (SEBI) ने 10 सितंबर को Demat 2.0 के तहत कॉरपोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। खास बात यह है कि इस पायलट के तहत पिछले कुछ दिनों में तीन कंपनियां टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड जारी कर चुकी हैं। अब सेबी यह परख रहा है कि नई तकनीक की मदद से सिक्योरिटीज की खरीद-बिक्री, सेटलमेंट और उससे जुड़ी सेवाओं को आपस में ज्यादा बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता है या नहीं। इस पहल की अगुवाई डिपॉजिटरी CDSL और NSDL कर रहे हैं। वहीं BSE, MSEI और NSE के साथ बैंक, बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियां, निवेशक, NPCI और अन्य नियामक भी इसमें सहयोग कर रहे हैं।
क्या है कॉरपोरेट बॉन्ड का टोकनाइजेशन?
टोकनाइजेशन का मतलब किसी सिक्योरिटी को डिजिटल टोकन के रूप में दर्ज करना है। इसके लिए Distributed Ledger Technology यानी DLT जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। SEBI का पायलट प्रोजेक्ट यह जांचेगा कि क्या इस तकनीक के जरिए सिक्योरिटी और उसके सेटलमेंट की प्रक्रिया को ज्यादा करीब लाया जा सकता है। इससे भविष्य में सेटलमेंट तेज करने और बॉन्ड से जुड़ी कुछ सेवाओं को ऑटोमेट करने में मदद मिल सकती है। SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने Global Fintech Fest 2026 में कहा कि इस पहल का बड़ा मकसद ऐसी बाजार व्यवस्था तलाशना है, जिसमें सिक्योरिटी, सेटलमेंट और उससे जुड़ी सेवाएं ज्यादा एकीकृत और प्रोग्रामेबल हो सकें।
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CBDC और Smart Contract का भी इस्तेमाल
इस पायलट में टोकनाइज्ड सिक्योरिटी के साथ Central Bank Digital Currency (CBDC) के जरिए डिजिटल सेटलमेंट और Smart Contract जैसी तकनीक को भी जोड़ा जा रहा है। Smart Contract को आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि कुछ नियम पहले से डिजिटल सिस्टम में तय कर दिए जाएं और शर्त पूरी होने पर आगे की प्रक्रिया अपने-आप शुरू हो जाए। हालांकि, नई तकनीक के साथ प्रयोग करते हुए SEBI के लिए यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सिक्योरिटी का मालिक कौन है, इसे लेकर कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट रहे।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
अभी यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, इसलिए इससे आम निवेशकों के लिए तत्काल कोई बड़ा बदलाव नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल SEBI नई तकनीक की क्षमता और उससे जुड़े जोखिमों को परख रहा है। अगर प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में सिक्योरिटी बाजार में तेज सेटलमेंट, ज्यादा ऑटोमेशन और अलग-अलग प्रक्रियाओं के बेहतर एकीकरण की संभावना बन सकती है।
टेक्नोलॉजी के साथ जोखिम भी बढ़ सकता है
SEBI चेयरमैन ने यह भी चेतावनी दी कि तकनीक बाजार को तेज और बड़ा बनाने में मदद करती है, लेकिन इससे जोखिम भी तेजी से फैल सकते हैं। जैसे-जैसे बाजार बड़ा, तेज और ज्यादा आपस में जुड़ा हुआ होगा, किसी एक हिस्से में आई तकनीकी कमजोरी दूसरे हिस्सों को भी तेजी से प्रभावित कर सकती है। इसलिए नई तकनीक अपनाने के साथ मजबूत और भरोसेमंद बुनियादी ढांचा तैयार करना जरूरी है। इसी दिशा में SEBI SupTech यानी Supervisory Technology पर भी जोर दे रहा है। इसका मकसद सिर्फ निगरानी के काम को ऑटोमेट करना नहीं है, बल्कि डेटा, एनालिटिक्स और AI की मदद से ऐसे पैटर्न और जोखिमों की पहचान करना है, जो पारंपरिक निगरानी से आसानी से नजर नहीं आते। SEBI चेयरमैन के मुताबिक, नियामक की कोशिश निगरानी व्यवस्था को ज्यादा Predictive बनाने की है, ताकि संभावित जोखिमों का पहले ही पता लगाया जा सके।
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AI और Tokenisation के साथ Quantum Computing की चुनौती
वित्तीय बाजार में Agentic AI, Tokenisation और Quantum Computing जैसी तकनीकों का असर आने वाले समय में बढ़ सकता है। इनसे बाजार में ज्यादा क्षमता और ऑटोमेशन आएगा, लेकिन नए जोखिम भी पैदा होंगे। खासकर Quantum Computing मौजूदा Cryptographic Security Systems के लिए भविष्य में चुनौती बन सकती है। SEBI का कहना है कि यह अभी तत्काल परिचालन समस्या नहीं है, लेकिन इसके लिए तैयारी अभी से शुरू करनी होगी। इसके लिए जरूरी सिस्टम की पहचान, उनकी प्राथमिकता तय करने, Crypto-Agility विकसित करने और धीरे-धीरे Post-Quantum Cryptography की ओर बढ़ने की जरूरत होगी।

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