ममता बनर्जी के घर पर हुई अहम बैठक, सिर्फ 8 विधायक और 6 सांसद ही शामिल हुए! पार्टी ने दी सफाई
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सामने राजनीतिक संकट गहराता नजर आ रहा है। पार्टी में जारी बगावत के बीच ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर बुलाई गई अहम बैठक में सांसदों और विधायकों की बेहद कम मौजूदगी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में हुई बैठक में पार्टी के 80 विधायकों में से सिर्फ 8 विधायक ही शामिल हुए। इससे पहले भी एक अहम बैठक में 60 विधायक गैरहाजिर रहे थे। बैठक में शामिल होने वाले विधायकों में मदन मित्रा, फिरहाद हकीम, कुणाल घोष, सोवनदेब चट्टोपाध्याय और अन्य नेता शामिल थे।
सांसदों की भी कम रही मौजूदगी
तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सांसदों में से केवल 4 सांसद ही बैठक में पहुंचे। वहीं राज्यसभा के 13 सांसदों में से सिर्फ 2 सांसदों ने हिस्सा लिया।
ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी बैठक में मौजूद रहे। राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन भी बैठक में शामिल हुए।
पार्टी ने दी सफाई
बैठक में कम उपस्थिति को लेकर उठे सवालों पर तृणमूल कांग्रेस ने सफाई दी है। पार्टी का कहना है कि यह सभी सांसदों और विधायकों की बैठक नहीं थी, बल्कि नेशनल वर्किंग कमेटी की बैठक थी।
पार्टी के मुताबिक कई नेता, जिनमें महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव, मुकुल संगमा और राजेश त्रिपाठी शामिल हैं, उन्होंने वर्चुअली बैठक में हिस्सा लिया।
बागी विधायक ने किया बड़ा दावा
इस बीच बागी खेमे के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रितब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उनके समर्थन में विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि उनके पास पहले ही दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों का समर्थन है और विधानसभा सत्र के दौरान यह संख्या और बढ़ सकती है।
रितब्रत बनर्जी ने यह भी कहा कि उनके साथ खड़े विधायकों की संख्या कम नहीं होगी, बल्कि समय के साथ और नेता उनके खेमे में शामिल होंगे।
BJP में जा सकते हैं कई विधायक!
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बागी विधायकों में से कई जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 सांसद भी बीजेपी के संपर्क में बताए जा रहे हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव हार के बाद शुरू हुई बगावत
तृणमूल कांग्रेस में यह बगावत विधानसभा चुनाव में बीजेपी से हार के बाद शुरू हुई। चुनाव में ममता बनर्जी को उनके गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर सीट पर भी हार का सामना करना पड़ा था।
इसके बाद पार्टी के कई नेताओं ने ममता बनर्जी की कार्यशैली और नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। हालात बिगड़ते देख पार्टी ने दो विधायकों को निष्कासित भी कर दिया।
तृणमूल के इतिहास का सबसे बड़ा संकट?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट तृणमूल कांग्रेस के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक विद्रोह बन सकता है। यदि बागी नेताओं की संख्या बढ़ती रही और सांसद-विधायक पार्टी छोड़ते रहे, तो ममता बनर्जी के लिए अपनी पार्टी को एकजुट रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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