Archana Puran Singh: क्रू मेंबर्स की बदहाली पर बरसीं अर्चना पूरन सिंह, फिल्म सेट्स पर 14 घंटे काम और भूखे पेट रहने की मजबूरी पर जताया गुस्सा
Last Updated on April 18, 2026 18:03, PM by Pawan
ग्लैमर और चकाचौंध से भरी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के पीछे का एक कड़वा सच एक बार फिर सामने आया है। मशहूर अभिनेत्री और कॉमेडी क्वीन अर्चना पूरन सिंह ने फिल्म सेट पर क्रू मेंबर्स के साथ होने वाले व्यवहार और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इसे निर्माताओं की ‘कंजूसी वाली मानसिकता’ करार देते हुए काम के घंटों और खाने के ब्रेक जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर बात की।
13-14 घंटे की शिफ्ट और बुनियादी हक की कमी
अर्चना पूरन सिंह ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सेट पर बढ़ते दबाव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में शिफ्ट का कोई तय वक्त नहीं रह गया है। शूटिंग अक्सर 12 घंटे से खींचकर 13-14 घंटे तक पहुंच जाती है। अर्चना के मुताबिक, सबसे दुखद बात यह है कि इस दौरान क्रू मेंबर्स को दोपहर के भोजन (लंच ब्रेक) के लिए भी वक्त नहीं दिया जाता।
अर्चना ने तीखे लहजे में कहा,
> “यह एक तरह की कंजूसी ही है। कंजूसी कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक मानसिकता है। आप उन लाइटमैन को खाना खाने से कैसे रोक सकते हैं, जो घंटों धूप में भारी उपकरण उठाकर खड़े रहते हैं? हमारे पास तो असिस्टेंट्स होते हैं जो फल या नाश्ता ला देते हैं, लेकिन उन बेचारे क्रू मेंबर्स का क्या? यह वाकई भयानक स्थिति है।”
सितारों ने भी मिलाया सुर में सुर
अर्चना के इस बयान का समर्थन उनकी आगामी फिल्म ‘टोस्टर’ के सह-कलाकारों ने भी किया है। राजकुमार राव ने सवाल उठाया कि आखिर शूटिंग के शेड्यूल को इस तरह क्यों नहीं मैनेज किया जाता कि सभी को समय पर भोजन मिल सके? उन्होंने क्रू मेंबर्स की भलाई को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। वहीं, सान्या मल्होत्रा ने भी इस बात पर हैरानी जताई कि कुछ प्रोडक्शन हाउस लंबे और थकाऊ शेड्यूल के बावजूद बेसिक ब्रेक देना जरूरी नहीं समझते।
इंडस्ट्री में बढ़ता विरोध
यह पहली बार नहीं है जब काम के घंटों को लेकर किसी बड़े सितारे ने आवाज उठाई है। पिछले साल दीपिका पादुकोण ने भी ‘8 घंटे की शिफ्ट’ की मांग रखी थी और रिपोर्ट्स के अनुसार, शर्तों के न माने जाने पर उन्होंने कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स से दूरी बना ली थी। अभिषेक बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर कहा कि छोटी-छोटी बचत करने के चक्कर में निर्माताओं का रवैया इंसानी संवेदनाओं को दरकिनार कर देता है।
अर्चना पूरन सिंह का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग क्रू मेंबर्स के मानवाधिकारों पर बहस कर रहे हैं। फिल्म इंडस्ट्री को करोड़ों का मुनाफा देने वाले ये ‘पर्दे के पीछे के नायक’ अगर भूखे पेट और अत्यधिक थकान में काम करेंगे, तो यह सिनेमा की चमक पर एक बड़ा धब्बा है। अब देखना यह है कि क्या अर्चना की इस खरी-खोटी के बाद प्रोडक्शन हाउस अपनी नीतियों में कोई सकारात्मक बदलाव लाते हैं या नहीं।
